ओडिशा: परीक्षा देकर लौटी 10वीं की छात्रा ने हॉस्टल में दिया बच्चे को जन्म, प्रशासन पर उठे सवाल

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ओडिशा के मलकानगिरी जिले में एक सरकारी आवासीय विद्यालय की 10वीं कक्षा की छात्रा के मां बनने का मामला सामने आने के बाद बवाल मच गया है। छात्रा बोर्ड परीक्षा देकर हॉस्टल लौटी थी और उसने समय से पहले बच्चे को जन्म दिया। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोपी युवक गिरफ्तार

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 22 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने छात्रा के साथ जबरदस्ती कर उसे गर्भवती कर दिया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने स्वयं थाने पहुंचकर लड़की से संबंध बनाने की बात स्वीकार कर ली

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय दंड संहिता की धारा 64 और 65 (1) के तहत मामला दर्ज किया है।

अस्पताल में भर्ती मां और बच्चा

सोमवार को परीक्षा देकर लौटने के बाद छात्रा ने छात्रावास में ही बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे और नवजात शिशु को मलकानगिरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया

लापरवाही पर प्रशासनिक कार्रवाई

मामले को गंभीरता से लेते हुए ओडिशा सरकार ने

  • स्कूल के प्रधानाध्यापक
  • एक सहायक नर्स
  • एक दाई को निलंबित कर दिया
    इसके अलावा, छात्रावास की मेट्रन को भी हटा दिया गया

परिवार ने उठाए सवाल

छात्रा के माता-पिता ने स्कूल प्रशासन से सवाल किया कि पूरे नौ महीनों तक गर्भवती होने की बात क्यों छिपाई गई और प्रसव पीड़ा शुरू होने तक यह मामला सामने क्यों नहीं आया?

कांग्रेस ने सरकार को घेरा

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
“एक आदिवासी समुदाय की छात्रा परीक्षा देकर लौटती है और बच्चे को जन्म देती है। यह प्रशासन की घोर लापरवाही और राज्य की नाकामी को दर्शाता है। आदिवासी छात्रों के कल्याण के लिए निगरानी तंत्र बनाया गया है, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई है।”

उन्होंने आगे कहा कि राज्यपाल को इस पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए और आदिवासी बच्चों की सुरक्षा और देखभाल को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रशासन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने सरकारी आवासीय विद्यालयों की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की एक चौंकाने वाली मिसाल बन चुकी है।

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