Mohit Jain
देश के चर्चित निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को 18 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी बरी कर दिया है। अब कोली को सभी 10 मामलों में मिली मौत की सजा और अन्य दोषसिद्धियों से पूरी तरह राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

निठारी हत्याकांड का संक्षिप्त इतिहास
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी गांव में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिले थे। इस मामले में पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। सुरेंद्र कोली को 15 साल की लड़की के अपहरण, बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। फरवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी, हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में कई मामलों में उन्हें बरी कर दिया था।
कोली का बिखरा परिवार और बर्बाद जीवन
18 साल जेल में बिताने के बाद अब कोली की जिंदगी पहले जैसी नहीं रही। उनकी बूढ़ी मां बेटे की बेगुनाही बताते-बताते दुनिया से चली गई, जबकि पत्नी बच्चों के साथ घर छोड़कर चली गई। गांव में उनका मकान जर्जर हालत में है और परिवार सामाजिक बहिष्कार का सामना कर चुका है।

क्यूरेटिव पिटीशन का महत्व
क्यूरेटिव याचिका अदालत का अंतिम कानूनी उपाय होती है, जिसे दुर्लभ मामलों में स्वीकार किया जाता है। सुरेंद्र कोली का केस भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबी मुकदमेबाजी और दया याचिका प्रक्रिया की मिसाल बन गया।
सवाल अभी भी बना हुआ
अब जबकि कोली निर्दोष साबित हो चुका है, यह सवाल उठता है कि क्या न्याय में हुई इतनी देरी उनके बर्बाद जीवन की भरपाई कर पाएगी। गांव के लोग कहते हैं, “अदालत से आज़ाद जरूर हुआ, लेकिन जिंदगी ने उसे पहले ही कैद कर दिया था।”





