BY
Yoganand Shrivastava
New Dehli बॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। पिछले दो महीनों से जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे इस दंपती को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने अंतरिम जमानत दे दी है। ₹30 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले के आरोप में राजस्थान पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए भट्ट दंपती की रिहाई का रास्ता अब साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “वसूली का साधन नहीं हो सकता कानून”
New Dehli राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा 31 जनवरी को जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद विक्रम भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले का उपयोग पैसे वसूलने के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और निर्देश दिया है कि बेल बॉन्ड जमा करने के बाद दोनों को तत्काल रिहा किया जाए।
7 दिसंबर से जेल में था यह चर्चित दंपती
New Dehli विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी, मैनेजर महबूब अंसारी और सहयोगी दिनेश कटारिया को राजस्थान पुलिस ने 7 दिसंबर 2025 को हिरासत में लिया था। मुंबई से गिरफ्तारी के बाद उन्हें उदयपुर लाया गया था, जहाँ वे न्यायिक हिरासत में थे। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 फरवरी 2026 की तारीख तय की है, जिसमें राज्य सरकार की दलीलों और केस के तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर ₹30 करोड़ के गबन का आरोप
New Dehli पूरा विवाद मुर्डिया नामक व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ था। आरोप है कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी ने एक फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर लगभग ₹30 करोड़ की राशि ली थी। शिकायत के अनुसार, इस धनराशि का निवेश प्रोजेक्ट में करने के बजाय कथित तौर पर फर्जी बिलों के माध्यम से निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने इसे ‘क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट’ (आपराधिक विश्वासघात) का मामला माना था। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
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