BY: MOHIT JAIN
ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे आरोपी महेश शर्मा को सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि आरोपी को 10 फलदार या नीम के पौधे लगाने होंगे और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी की होगी।
मामला क्या है?
ग्वालियर पुलिस ने साल 2010 में महेश शर्मा को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 149 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि महेश शर्मा पहले ही 10 साल 8 महीने की सजा काट चुका है और वह समाज की सेवा करना चाहता है।
हाईकोर्ट का आदेश

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीजन बेंच ने महेश शर्मा की सजा पर फिलहाल रोक लगाई। साथ ही उसे 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया।
कोर्ट ने यह शर्त भी रखी कि:
- आरोपी को 10 फलदार या नीम के पौधे लगाने होंगे।
- पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी उसी की होगी।
- रिहाई के 30 दिन के भीतर पौधों की तस्वीरें ट्रायल कोर्ट में पेश करनी होंगी।
- जुर्माने की राशि जमा करना अनिवार्य होगा।
समाज और पर्यावरण को जोड़ने वाली पहल
कोर्ट का यह फैसला केवल एक आरोपी की रिहाई भर नहीं है, बल्कि इसमें समाज और पर्यावरण दोनों को जोड़ने का प्रयास नजर आता है। पौधारोपण की शर्त न सिर्फ आरोपी को जिम्मेदारी का अहसास कराएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी।





