Bhopal मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि पत्रकारिता केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि समाज की चेतना और राष्ट्र निर्माण का जीवंत माध्यम है। बुधवार को माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्यपाल ने हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला।

Bhopal ‘उदंत मार्तण्ड’ से आज तक: जन कल्याण ही सर्वोपरि
राज्यपाल श्री पटेल ने हिन्दी के प्रथम समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि इसके संपादकीय में “हिंदुस्तानियों के हित” का जो लक्ष्य रखा गया था, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारिता का स्वरूप हमेशा जन-कल्याणकारी और राष्ट्र-हितैषी होना चाहिए।

Bhopal वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान और माधव राव सप्रे पुरस्कार
इस गरिमामयी अवसर पर राज्यपाल ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया:
- माधव राव सप्रे सम्मान: श्री विकास मिश्र (वरिष्ठ संपादक, लोकमत समाचार)।
- महेश गुप्ता सृजन सम्मान: श्री अरुण नेथानी।
- अशोक मानोरिया पुरस्कार: डॉ. बृजेश शर्मा।
Bhopal डिजिटल युग की चुनौतियां और ‘फेक न्यूज’ पर प्रहार
राज्यपाल ने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल क्रांति ने जहाँ नवाचार के द्वार खोले हैं, वहीं ‘फेक न्यूज’ और भ्रामक सूचनाओं के कारण विश्वसनीयता का संकट भी खड़ा किया है। उन्होंने कहा:

“सच की राह कठिन हो सकती है, लेकिन पाठक का भरोसा केवल सत्य से ही मिलता है। आज की पीढ़ी को पॉडकास्ट, वीडियो और मोबाइल ऐप जैसे आधुनिक माध्यमों के जरिए हिन्दी पत्रकारिता के रचनात्मक पहलुओं से जोड़ना अनिवार्य है।”
Bhopal स्वतंत्रता संग्राम और हिन्दी पत्रकारिता का योगदान
श्री पटेल ने बताया कि भारत के नव-जागरण, स्वाधीनता आंदोलन और स्वदेशी के संकल्प को जन-मानस तक पहुँचाने में हिन्दी पत्रकारिता की रीढ़ की हड्डी की तरह रही है। उन्होंने आधुनिक हिन्दी भाषा को शून्य से शिखर तक ले जाने वाले कवियों, लेखकों और महान संपादकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।





