मध्यप्रदेश से एक बेहद चौंकाने वाली और हास्यास्पद खबर सामने आई है। भिंड जिले में एक युवक ने बिजली कटौती से बचने के लिए ऐसा कदम उठा लिया, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है — उसने पूरा ट्रांसफार्मर ही चुरा लिया। इस अजीबोगरीब घटना ने न सिर्फ प्रशासन को हैरान कर दिया है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है।
घटना की पूरी कहानी
यह मामला मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के असवार बिजली वितरण केंद्र के अंतर्गत आता है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी युवक सोनू त्रिपाठी, निवासी रावतपुरा, पर बिजली बिल का बकाया ₹1,49,795 था।
बिजली विभाग को शक था कि बकाया राशि के चलते उसका कनेक्शन कभी भी काटा जा सकता है। इसी डर से सोनू ने ऐसा कदम उठाया जो आज प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
ट्रांसफार्मर चुराने की वजह
- बिजली बिल का बड़ा बकाया (₹1.49 लाख)
- कनेक्शन कटने का डर
- बिजली आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश
आरोप है कि सोनू त्रिपाठी ने ट्रांसफार्मर को हटाकर उसे अपने घर में छुपा लिया ताकि बिजली कटौती से बचा जा सके।
JE की शिकायत पर FIR दर्ज
बिजली कंपनी के जूनियर इंजीनियर (JE) अभिषेक सोनी ने शिकायत दर्ज कराई कि रामबिहारी त्रिपाठी की कोठी के पास रखा गया ट्रांसफार्मर अब वहां नहीं है। जांच के बाद पता चला कि आरोपी सोनू ने ट्रांसफार्मर हटा दिया है।
इसके बाद कंपनी ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 136 के तहत:
- सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने
- सरकारी संपत्ति को अवैध रूप से हटाने
के आरोप में FIR दर्ज करवाई है।
पुलिस जांच जारी
भिंड पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक चोरी हुआ ट्रांसफार्मर बरामद नहीं हुआ है।
मध्यप्रदेश में “अजब-गजब” घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब मध्यप्रदेश से इस तरह की अनोखी खबर सामने आई हो। राज्य को लेकर अक्सर कहा जाता है, “एमपी अजब है, सबसे गजब है” — और इस ताजा घटना ने इस कहावत को फिर से सच साबित कर दिया है।
सोशल मीडिया पर लोग बोले – “ऐसा सिर्फ MP में ही हो सकता है!”
इस खबर को लेकर इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कई यूजर्स ने कहा:
“बिजली विभाग को ट्रांसफार्मर चुराने वालों से नहीं, ऐसे ‘जुगाड़बाज’ ग्राहकों से डरना चाहिए।”
निष्कर्ष
यह मामला एक गंभीर अपराध के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और उपभोक्ता की मनोदशा दोनों पर सवाल खड़े करता है। ट्रांसफार्मर चोरी जैसे मामले सरकार और बिजली कंपनियों के लिए चेतावनी हैं कि भुगतान प्रणाली, निगरानी और उपभोक्ता संवाद को और पारदर्शी बनाने की ज़रूरत है।





