संवाददाता- प्रताप सिंह बघेल
Morena मुरैना जिला एक बार फिर पारिस्थितिकी तंत्र के रक्षकों यानी गिद्धों की चहचहाहट से गुलजार हो रहा है। वन विभाग के विशेष प्रयासों और संरक्षण की युक्तियों के चलते जिले में गिद्धों की आबादी में संतोषजनक वृद्धि दर्ज की गई है। हाल ही में संपन्न हुई शीतकालीन गणना के आंकड़ों ने पर्यावरण प्रेमियों के चेहरे पर खुशी ला दी है, जिसमें सबसे अधिक संख्या पहाड़गढ़ रेंज में पाई गई है।
तीन दिवसीय गणना अभियान: 61 बीट और 44 घाटों पर हुई पड़ताल
Morena मुरैना जिले में 20 फरवरी से शुरू हुए तीन दिवसीय विशेष गणना अभियान के तहत जिले की सभी 61 बीटों और चंबल नदी के 44 प्रमुख घाटों पर सघन मॉनिटरिंग की गई।
- पहले दिन (20 फरवरी): 131 गिद्ध नजर आए।
- दूसरे दिन (21 फरवरी): 115 गिद्धों की उपस्थिति दर्ज हुई।
- तीसरे दिन (22 फरवरी): 124 गिद्ध देखे गए। पूरी गणना के संकलन के बाद जिले में कुल 370 गिद्ध पाए गए हैं। इनमें पहाड़गढ़ रेंज 129 गिद्धों के साथ जिले में शीर्ष स्थान पर रही है।
वल्चर स्टेट का गौरव: विलुप्ति की कगार से वापसी
Morena एक समय ऐसा था जब 1992 से 2007 के बीच चंबल सहित पूरे मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या में 99 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई थी, जिसके कारण इन्हें विलुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया था। हालांकि, संरक्षण के कड़े कदमों ने तस्वीर बदल दी है। भारत में पाए जाने वाली गिद्धों की 9 प्रजातियों में से 7 अकेले मध्य प्रदेश में निवास करती हैं। फरवरी 2025 की राज्य स्तरीय गणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब कुल 12,710 गिद्ध हैं, जो प्रदेश के ‘वल्चर स्टेट’ होने की पुष्टि करते हैं।
स्वच्छता के दूत: क्यों महत्वपूर्ण है यह संख्या वृद्धि?
Morena गिद्धों को प्रकृति का ‘सफाई कर्मी’ या ‘स्वच्छता दूत’ कहा जाता है क्योंकि ये मृत जानवरों के अवशेषों को खाकर बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं। चंबल अंचल में इनकी बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि यहाँ का पर्यावरण और खाद्य श्रृंखला फिर से संतुलित हो रही है। वन विभाग की विशेष निगरानी और मवेशियों को दी जाने वाली हानिकारक दवाओं पर नियंत्रण ने इनकी प्रजनन क्षमता और उत्तरजीविता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
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