रिपोर्ट – प्रांशु क्षत्रिय | बिलासपुर
बिलासपुर जिले में बढ़ते भूजल संकट और जल संरक्षण के लिए शुरू किया गया ‘मोर गांव – मोर पानी’ अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इस अभियान के तहत गांव-गांव में दीवार लेखन, रैली और ग्राम सभाओं के जरिए जल संरक्षण का संदेश फैलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लेकर महिला स्व-सहायता समूह तक सभी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
अभी हाल ही में, सीपत प्रेस क्लब भवन में एक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। इस शिविर में जल संरक्षण के वैज्ञानिक तरीकों और वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार वर्षा के पानी का संचयन कर गांवों में पानी की कमी को कम किया जा सकता है।
जनपद अध्यक्ष सरस्वती सोनवानी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में तहसीलदार सोनू अग्रवाल, प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रदीप पांडेय, सीपत सरपंच मनीषा योगेश वंशकार सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी मौजूद रहीं। सभी ने जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण शिविर में बताया गया कि जल पुनर्भरण और वॉटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों से किस प्रकार भूजल स्तर को फिर से ऊपर लाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव हो सकते हैं, और प्रत्येक गांववाले को जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
यह अभियान न केवल जल संकट के समाधान के लिए एक ठोस कदम है, बल्कि यह समुदाय आधारित विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। अब तक की सफलता और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत देती है कि यह आंदोलन जल्द ही व्यापक रूप से फैल सकता है।





