BY
Yoganand Shrivastava
Mathura मथुरा के फालेन गांव में सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत करते हुए संजू पांडा नामक व्यक्ति ने जलती हुई होलिका की आग के बीच से दौड़कर सबको चौंका दिया। आस्था का यह अटूट प्रदर्शन देखकर लोग हैरान रह गए, क्योंकि आग की लपटों के बीच से निकलने के बावजूद संजू पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनके अनुसार, यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि कड़े संकल्प और धार्मिक नियमों का पालन करने का परिणाम है।
कठिन साधना और सवा महीने का कड़ा उपवास
Mathura इस जोखिमभरी परंपरा को निभाना आसान नहीं है। संजू पांडा ने बताया कि इसकी तैयारी वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है। इस दौरान उन्हें ‘सवा महीने का प्रण’ लेना पड़ता है, जिसमें ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। इस पूरी अवधि में वे अन्न का त्याग कर देते हैं और सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर केवल साधना में लीन रहते हैं। परिवार और सुख-सुविधाओं का त्याग करने के बाद ही वे इस अग्नि परीक्षा के लिए तैयार होते हैं।
फालेन गांव की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत
Mathura मथुरा का फालेन गांव इस अनोखी परंपरा के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि जिस तरह पौराणिक कथाओं में भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु की कृपा से आग में सुरक्षित रहे थे, उसी आस्था को प्रतीक रूप में यहाँ हर साल दोहराया जाता है। गांव के पंडा समाज का एक व्यक्ति इस परंपरा का निर्वहन करता है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मथुरा पहुँचते हैं।
ब्रज में होली का विविध और अनूठा रंग
Mathura मथुरा और वृंदावन की होली केवल रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ लठमार होली, फूलों की होली और ‘हुरंगा’ जैसे कई सांस्कृतिक रूप देखने को मिलते हैं। इस वर्ष चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन और रंगों की होली की तिथियों में विशेष परिवर्तन रहा, जिसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ब्रज की गलियां अब 4 मार्च को होने वाले मुख्य रंगोत्सव के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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