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गुजरात सरकार में बड़ा फेरबदल: सभी 16 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, शुक्रवार को नई कैबिनेट लेगी शपथ; 8 नए चेहरे जुड़ सकते हैं

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BY: Yoganand Shrivastva

गांधीनगर | गुजरात में भूपेंद्र पटेल सरकार ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए अपने सभी मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल जल्द ही राज्यपाल देवव्रत आचार्य को मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे सौंपेंगे। शुक्रवार सुबह 11:30 बजे गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह होगा। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा 16 मंत्रियों में से 8 को बदलने की संभावना है, जबकि कुछ पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिल सकता है। नई कैबिनेट में कांग्रेस से भाजपा में आए कुछ नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है।

दिल्ली से अहम चेहरे मौजूद रहेंगे

शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहेंगे। अमित शाह गुरुवार रात गुजरात पहुंचेंगे, जबकि जेपी नड्डा शुक्रवार सुबह आएंगे। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी आज गांधीनगर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मुंबई से लौटने के बाद रात 8 बजे अपने आवास पर मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे, जहां इस्तीफों को औपचारिक रूप से राज्यपाल को भेजा जाएगा।

संभावित बदलाव और नए चेहरे

भूपेंद्र पटेल ने दिसंबर 2022 में 16 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। अब तीन साल बाद पहली बार बड़े स्तर पर बदलाव होने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, 7 से 10 मौजूदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि 5 से 7 को फिर से शामिल किया जाएगा।

नए चेहरों में ये नाम चर्चा में हैं:

  • अर्जुन मोढवाड़िया
  • अल्पेश ठाकोर
  • सी.जे. चावड़ा
  • हार्दिक पटेल
  • जयेश रादडिया
  • जीतू वाघानी

नई टीम में सौराष्ट्र, उत्तर गुजरात और पाटीदार समुदाय को खास प्रतिनिधित्व देने की संभावना है।

जिन मंत्रियों को हटाया जा सकता है, उनमें —
पुरुषोत्तम सोलंकी (मत्स्य पालन व पशुपालन),
बच्चूभाई खाबर (पंचायत विभाग),
मुकेश पटेल (वन एवं पर्यावरण),
भीखूसिंह परमार (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति) और
कुंवरजी हलपति (आदिवासी विकास) शामिल हैं।

फेरबदल की चार प्रमुख वजहें

  1. तीन साल से कोई बदलाव नहीं:
    2022 के बाद से मंत्रिमंडल में कोई फेरबदल नहीं हुआ। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन नई ऊर्जा और रणनीति के साथ उतरना चाहता है।
  2. प्रदर्शन से नाराजगी:
    कई मंत्रियों के कामकाज से भाजपा नेतृत्व संतुष्ट नहीं है। हाल ही में हुए विसावदर उपचुनाव में पार्टी को AAP से हार का सामना करना पड़ा, जिसने केंद्रीय नेतृत्व को सक्रिय कदम उठाने पर मजबूर किया।
  3. पुराने नेताओं की वापसी:
    भाजपा अब अनुभवी नेताओं को फिर से जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है। रणनीति यह है कि 2027 के चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों में तालमेल बनाया जाए।
  4. सत्ता-विरोधी लहर रोकने की कोशिश:
    गुजरात में जब भी जनता में असंतोष बढ़ा है, भाजपा ने समय रहते चेहरों में बदलाव किया है — चाहे वह आनंदीबेन पटेल हों या विजय रूपाणी। यह फेरबदल भी उसी रणनीति का हिस्सा है ताकि सरकार की छवि को तरोताजा किया जा सके।

रूपाणी सरकार के बाद पटेल का दौर

2021 में भाजपा आलाकमान ने विजय रूपाणी के पूरे मंत्रिमंडल को हटाकर सभी को चौंका दिया था। इसके बाद भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया, जिनके नेतृत्व में भाजपा ने 2022 विधानसभा चुनाव में 156 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।अब यह फेरबदल 2027 के चुनाव की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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