रिपोर्ट- हिमांशु पटेल, एडिट- विजय नंदन
रायपुर-राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ में कथित डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) घोटाले के संबंध में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने बुधवार सुबह राज्य भर में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। घोटाले से जुड़े ठेकेदारों और सप्लायरों के कुल 12 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा गया है।


राजनांदगांव में तीन प्रमुख कारोबारियों पर दबिश
राजनांदगांव शहर में ACB/EOW की टीम ने एक साथ तीन स्थानों पर छापेमारी की, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया। रायपुर से लगभग 10 गाड़ियों के काफिले में पहुंची अधिकारियों की टीम ने सुबह करीब 5:30 बजे दबिश दी। जिन कारोबारियों के आवासों पर कार्रवाई हुई, वे हैं अग्रवाल परिवार का निवास, भारत माता चौक स्थित राधा कृष्ण एजेंसी के संचालक। यश नहाटा का घर: सत्यम विहार कॉलोनी स्थित आवास। ललित भंसाली का ठिकाना: कामठी लाइन स्थित आवास। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य रूप से खनन (माइनिंग) से जुड़े कारोबारियों, बड़े सप्लायरों और ब्रोकरों से संबंधित है। टीम इन संबंधित लोगों के वित्तीय लेन-देन और ठेकों की जानकारी से जुड़े दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच कर रही है। प्रदेशभर में 12 स्थानों पर छापेमारी, राजनांदगांव के अलावा, ACB/EOW की संयुक्त टीम ने प्रदेशभर में कुल 12 स्थानों पर छापा मारा है। जिसमें रायपुर 5, राजनांदगांव 3, दुर्ग 2, कुरूद 1, कुल11 (नोट: प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 12 ठिकानों पर दबिश की सूचना है), जिसमें रायपुर के वॉलफोर्ड एनक्लेव सोसाइटी में भी छापेमारी की जानकारी मिली है।

क्या है DMF घोटाला?
डीएमएफ घोटाला, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। इस फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए किया जाना था। इस मामले में पहले भी कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें निलंबित आईएएस रानू साहू, उपसचिव सौम्या चौरसिया, आदिवासी विभाग की सहायक आयुक्त माया वारियर और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी जैसे नाम शामिल हैं। गिरफ्तारी से बाहर चल रहे आरोपियों में संजय शेंडे, ऋषभ सोनी और राकेश कुमार शुक्ला शामिल हैं, जबकि वर्तमान कार्रवाई ठेकेदारों और सप्लायरों के नेटवर्क पर केंद्रित है। शहर में EOW की कार्रवाई की खबर फैलते ही अटकलों का बाजार गर्म है और लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि जांच की यह कड़ी आगे किन लोगों तक पहुंच सकती है।





