संवाददाता: ताराचंद पटेल
महासमुंद जिले के ग्राम बिरकोनी में स्थित मनोरमा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इन दिनों विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी कूटरचना कर उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रही है। जिस ज़मीन पर 19 साल पहले प्रशासन ने उन्हें बसाया था और शासकीय योजनाओं का लाभ दिया था, अब उसी आशियाने को छीनने की आशंका ग्रामीणों को सताने लगी है। इस मामले की शिकायत ग्रामीणों ने कलेक्टर से की है।
ग्रामीणों का आरोप – “हमारा घर छीनने की साजिश”
कलेक्टर कार्यालय के सामने इकट्ठा होकर ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें पट्टा देकर घर बनाने की अनुमति दी थी, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए स्कूल-आंगनबाड़ी बनवाया गया, पीएम आवास जैसी योजनाओं का लाभ मिला। लेकिन अब मनोरमा फैक्ट्री प्रबंधन उद्योग विभाग के जरिये जमीन को लीज़ पर लेकर कंपनी का विस्तार करना चाहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि –
- इस प्रक्रिया की जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
- न तो ग्राम पंचायत से एनओसी लिया गया और न ही ग्राम सभा में अनुमोदन कराया गया।
- जब तहसीलदार न्यायालय से दावा-आपत्ति की मांग की गई, तब जाकर उन्हें इस प्रकरण की भनक लगी।
इसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
किन जमीनों पर है विवाद?
ग्राम पंचायत बिरकोनी, पटवारी हल्का क्रमांक 33 की शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 2435, 2436, 2619, 2620, 2614 और 2616 कुल 3.48 हेक्टेयर को कंपनी ने उद्योग विभाग से आबंटित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन जमीनों पर पहले से ही लगभग 45 परिवार बसे हुए हैं। यहां उनके घर, स्कूल-आंगनबाड़ी, पीएम आवास, तालाब, पशु चरागाह और मुक्तिधाम तक का निर्माण कराया गया है।
कलेक्टर का बयान
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि –
“ग्राम बिरकोनी औद्योगिक क्षेत्र है, जहां उद्योग विभाग के माध्यम से जमीन आबंटित की जाती है। इस प्रक्रिया के लिए इस्तिहार का प्रकाशन किया गया था। ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है और जब तक उसका निराकरण नहीं होगा, आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
ग्रामीणों की दुविधा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह जमीन कंपनी को आबंटित कर दी जाती है, तो उनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचेगा। 19 साल से बसे इन परिवारों को अब बेघर होने का खतरा सता रहा है।





