Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचाने का एक निर्णायक रोडमैप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मध्य प्रदेश इस अभियान में देश के लिए एक ‘आदर्श मॉडल’ बनेगा।
डिजिटल जनगणना: भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक अभियान
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल जनगणना कराने के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि आज जब भारत दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है, तब यह डेटा वैश्विक महत्व रखता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनगणना के दौरान गांवों और टोलों के साथ-साथ ‘बेचिराग गांवों’ (जहाँ आबादी नहीं है) की स्थिति का भी सटीक आकलन किया जाए। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसे संसाधनों का वितरण इन्हीं आंकड़ों पर आधारित होता है, इसलिए शासन की पारदर्शिता के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कलेक्टर-कमिश्नरों को निर्देश: समय-सीमा में पूर्ण करें लक्ष्य
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री ने मैदानी प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर कलेक्टर और कमिश्नर्स को जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं, इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाई जाए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने आगामी 16 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र और महाशिवरात्रि व होली जैसे त्योहारों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति समितियों की बैठकें करने के भी कड़े निर्देश दिए।
‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’: भावांतर योजना और राजस्व लक्ष्यों पर चर्चा
Madhya Pradesh प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री ने भावांतर योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों की पीठ थपथपाई। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित किया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उड़द, मूंगफली और मक्का जैसी फसलों को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने नरवाई (पराली) जलाने की घटनाओं को शून्य करने और खनिज, आबकारी एवं पंजीयन विभाग को अपने राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश दिए।





