Madhya Pradesh : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य न केवल एक महान शासक थे, बल्कि वे भारतीय साहस, संगठन और सांस्कृतिक समृद्धि के कालजयी प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री निवास ‘समत्व भवन’ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी ‘विक्रमोत्सव-2026’ को इस प्रकार आयोजित किया जाए कि नई पीढ़ी उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और ऐतिहासिक योगदान से गहराई से परिचित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह आयोजन भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा के उच्चतम मानकों पर आधारित होना चाहिए।

सोनू निगम की स्वर लहरियां और अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव
Madhya Pradesh इस वर्ष विक्रमोत्सव का आकर्षण वैश्विक स्तर का होने वाला है। हिंदू नववर्ष यानी वर्ष प्रतिपदा (19 मार्च) के अवसर पर उज्जैन में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम अपनी प्रस्तुति देंगे। उत्सव की सबसे अनूठी विशेषताओं में से एक ‘पौराणिक फिल्म महोत्सव’ होगा, जिसमें दुनिया के 20 से अधिक देशों की पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा, संगीत के उद्भव और विकास पर केंद्रित ‘अनहद’ वैचारिक समागम का आयोजन होगा, जो शोधकर्ताओं और संगीत प्रेमियों के लिए ज्ञान का केंद्र बनेगा।
विज्ञान, कृषि और शिक्षा का अनूठा संगम
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए हैं कि इस बार विक्रमोत्सव को केवल सांस्कृतिक दायरे तक सीमित न रखकर इसे वैज्ञानिक और कृषि गतिविधियों से भी जोड़ा जाए। सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को उजागर करने के लिए इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और विज्ञान महाविद्यालयों को शोध संगोष्ठियों से जोड़ा जाएगा। साथ ही, वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए प्राकृतिक खेती, दुग्ध उत्पादन और उद्यानिकी पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। स्कूलों और कॉलेजों में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

शिवरात्रि से वर्ष प्रतिपदा तक आयोजनों की श्रृंखला
Madhya Pradesh विक्रमोत्सव का आगाज 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के साथ होगा, जिसमें ‘शिवार्चन’ और प्रीतम एवं बैंड की ‘शिवोSहम’ प्रस्तुति मुख्य आकर्षण होगी। इसके बाद क्रमवार विक्रम नाट्य समारोह, अंतरराष्ट्रीय इतिहास समागम, पुतुल समारोह और विभिन्न बोलियों में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। 18 मार्च को आयोजित होने वाली ‘वेद अंताक्षरी’ भारतीय ज्ञान के संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण पेश करेगी। उत्सव का समापन 19 मार्च को उज्जयिनी गौरव दिवस के रूप में होगा, जहाँ शिप्रा तट पर विक्रम पंचांग का लोकार्पण और भव्य आतिशबाजी के साथ महाकाल की नगरी अपनी विरासत का उत्सव मनाएगी।
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