Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान कल्याण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री निवास (समत्व भवन) में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने गेहूं और उड़द की खरीदी पर बोनस देने के साथ-साथ सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति के नियमों में बदलाव करने के निर्देश दिए।
गेहूं खरीदी पर ₹40 बोनस, पंजीयन की तारीख भी बढ़ी
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को ₹40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस प्रदान करेगी। इसके साथ ही, किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) की अंतिम तिथि, जो पहले 7 मार्च थी, उसे बढ़ाकर अब 10 मार्च कर दिया गया है। इस निर्णय से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो तकनीकी कारणों या समय की कमी के चलते अब तक अपना पंजीयन नहीं करा पाए थे।
राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। आज भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में किसानों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किये।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 6, 2026
राज्य सरकार इस वर्ष गेहूं खरीदी पर ₹40 प्रति क्विंटल बोनस प्रदान करेगी।
गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च… pic.twitter.com/D0TYb2vdPJ
उड़द की खेती को बढ़ावा: ₹600 प्रति क्विंटल बोनस का ऐलान
Madhya Pradesh दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने उड़द की फसल पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। डॉ. यादव ने किसानों से अपील की कि वे उड़द की बुवाई करें ताकि उन्हें न केवल इस भारी-भरकम बोनस का लाभ मिले, बल्कि उनकी जमीन की उर्वरता भी सुधरे और वे अगली फसल के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
रात की परेशानी खत्म: सिंचाई के लिए दिन में मिलेगी बिजली
Madhya Pradesh किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान करते हुए सरकार ने अब सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रात के समय सिंचाई करने में किसानों को कड़ाके की ठंड, जंगली जानवरों का डर और अन्य कई संकटों का सामना करना पड़ता है। दिन में बिजली मिलने से किसान सुरक्षित और सुलभ तरीके से अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे, जिससे खेती की लागत और मेहनत दोनों में सुधार होगा।





