BY
Yoganand Shrivastava
Maa Baglamukhi Temple Donation Scam धार्मिक स्थलों पर दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर देशव्यापी चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में चंदा और आभूषणों की हेराफेरी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित इस विश्वप्रसिद्ध मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले नकद दान और सोने-चांदी के जेवरातों में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने एक उच्च स्तरीय त्रि-सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया है, जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

Maa Baglamukhi Temple Donation Scam कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली पोल, समानांतर चल रही थी प्राइवेट समिति
इस पूरे प्रशासनिक और वित्तीय घोटाले की शुरुआत तब हुई जब आगर-मालवा की जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने पिछले दिनों मां बगलामुखी मंदिर का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्हें मौके पर दान-पुण्य और रसीदों में भारी विसंगतियां देखने को मिलीं। शुरुआती जांच और शिकायतों के अनुसार, मंदिर के सुचारू संचालन के लिए अधिकृत ‘शासकीय प्रबंधन समिति’ के समानांतर वहां एक गैर-शासकीय और अपंजीकृत (Unregistered) प्राइवेट समिति सक्रिय थी। यह निजी समिति कानून और नियमों को ताक पर रखकर भक्तों से सीधे तौर पर नगदी और जेवरात वसूल रही थी।

Maa Baglamukhi Temple Donation Scam गर्भगृह के सौंदर्यीकरण के नाम पर खेल, सरकारी खजाने के बजाय निजी खातों में गई रकम
लगाए गए आरोपों के मुताबिक, इस अपंजीकृत प्राइवेट समिति ने मंदिर की वास्तविक और कानूनी रूप से मान्य सरकारी कमेटी को पूरी तरह से साइडलाइन (नेपथ्य में) कर दिया था। श्रद्धालुओं से जो भी दान, मन्नत का चढ़ावा या गुप्त दान मिलता था, उसे मंदिर के आधिकारिक सरकारी बैंक खातों में जमा कराने के बजाय सोची-समझी रणनीति के तहत कुछ चुनिंदा निजी बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर किया जा रहा था। इतना ही नहीं, मंदिर के गर्भगृह के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के काम में भी लाखों-करोड़ों रुपये के लेन-देन का पूरा खेल इसी प्राइवेट समिति के जरिए किया गया, जिसका अब तक कोई पुख्ता ऑडिट या वित्तीय लेखा-जोखा मौजूद नहीं है।

Maa Baglamukhi Temple Donation Scam पारदर्शी व्यवस्था और कड़े दान प्रबंधन को लेकर देश भर के मंदिरों में उठी मांग
हाल के दिनों में देश के अन्य बड़े और प्रतिष्ठित देवस्थानों में भी दान राशि और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद से ही मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक व्यापक बहस छिड़ गई है। मां बगलामुखी मंदिर में हुई इस प्रशासनिक चूक को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। कलेक्टर द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय जांच टीम अब मंदिर की पुरानी रसीदों, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध निजी खातों के वित्तीय लेन-देन (बैंक स्टेटमेंट्स) की स्क्रूटनी कर रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके।





