कृष्णमूर्ति वेंकट सुब्रमण्यम एक प्रसिद्ध भारतीय अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य किया। 5 मई 1971 को छत्तीसगढ़ के भिलाई में जन्मे सुब्रमण्यम ने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और आईआईएम कलकत्ता से एमबीए की डिग्री प्राप्त की। बाद में उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, जहाँ उनके मार्गदर्शक पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन थे।
आईएमएफ से अचानक वापसी की वजह
30 अप्रैल 2025 को जारी एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से सुब्रमण्यम को उनके तीन साल के कार्यकाल से छह महीने पहले ही आईएमएफ से वापस बुला लिया गया। हालांकि सरकार ने इसका कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो प्रमुख कारण सामने आए हैं:
- आईएमएफ डेटा को लेकर मतभेद: सुब्रमण्यम ने आईएमएफ के डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, जिससे आईएमएफ के अधिकारियों में नाराजगी थी।
- पुस्तक प्रचार विवाद: उनकी हालिया पुस्तक “India @100: Envisioning Tomorrow’s Economic Powerhouse” के प्रचार को लेकर कथित तौर पर आपत्ति जताई गई, जिसे उनके पद के साथ अनुचित माना गया।
पाकिस्तान को फंडिंग के मुद्दे का संदर्भ
यह निर्णय एक महत्वपूर्ण समय पर आया है जब 9 मई 2025 को आईएमएफ बोर्ड की बैठक होनी है, जहाँ भारत पाकिस्तान को नई फंडिंग का विरोध करने वाला था। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 पर्यटक मारे गए) के बाद भारत का तर्क था कि पाकिस्तान आतंकवाद को फंड कर रहा है। सुब्रमण्यम का इस महत्वपूर्ण वोट से ठीक पहले हटाया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।

सुब्रमण्यम की पुस्तक: India @100
सुब्रमण्यम की पुस्तक “India @100: Envisioning Tomorrow’s Economic Powerhouse” (रूपा पब्लिकेशन्स, 2024) में उन्होंने भारत को 2047 तक 55 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का रोडमैप प्रस्तुत किया है। पुस्तक में उनका तर्क है कि भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और 2014 के बाद लागू की गई नीतियों को आगे बढ़ाकर 8% की वार्षिक वृद्धि दर हासिल की जा सकती है।
निष्कर्ष
कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम का आईएमएफ से अचानक हटाया जाना एक असामान्य घटना है, क्योंकि भारतीय प्रतिनिधि आमतौर पर अपना कार्यकाल पूरा करते हैं। सरकार द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन यह निर्णय निश्चित रूप से आईएमएफ में भारत की भविष्य की रणनीति को प्रभावित करेगा। अब सरकार द्वारा जल्द ही नए कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति की उम्मीद है।





