BY: Yoganand Shrivastva
उत्तराखंड: टिहरी ज़िले का एक छोटा-सा गांव, जिसे लोग उसके नाम से ही डर के साथ याद करते थे, अब नई पहचान पा चुका है। कभी ‘खूनी गांव’ कहलाने वाले इस स्थान का नाम बदलकर राज्य सरकार ने ‘देवीग्राम’ कर दिया है। लंबे समय से ग्रामीण अपने गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे थे, क्योंकि यह डरावना नाम उनके बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए मानसिक तनाव का कारण बन गया था। आखिरकार 18 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंज़ूरी और गृह मंत्रालय की सहमति के बाद इसका नाम औपचारिक रूप से बदल दिया गया।
नाम बदलने की पहल किसने की?
ओएनजीसी के पूर्व महाप्रबंधक ललित मोहन जोशी ने गांव की छवि सुधारने के लिए लगातार पहल की। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस नाम को बदलने की कोशिशें कीं। इसके लिए ग्रामीणों ने सांसद अजय टम्टा और मुख्यमंत्री धामी से भी अपनी समस्या रखी थी। अंततः सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर गांव को नया नाम दे दिया।
कितनी है आबादी?
गांव में लगभग 60 परिवार रहते हैं और कुल जनसंख्या करीब 380 के आसपास है।
क्यों पड़ा ‘खूनी गांव’ नाम?
हालांकि इस नाम की पुष्टि करने वाले कोई लिखित दस्तावेज नहीं मिलते, लेकिन गांव में कई कहानियां पीढ़ियों से सुनाई जाती हैं।
- बुजुर्ग बताते हैं कि ब्रिटिश शासन के दौरान यहां अंग्रेजों और ग्रामीणों के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें काफी खून बहा। इसी वजह से गांव को ‘खूनी गांव’ कहा जाने लगा।
- एक अन्य मान्यता यह भी है कि बहुत पुराने समय में यहां कुछ अलौकिक और अप्रिय घटनाएं घटीं, जिसके कारण यह नाम प्रचलित हो गया।
अब ‘देवीग्राम’ से मिलेगी नई पहचान
गांव का नाम बदलने से ग्रामीणों को राहत मिली है। उनका मानना है कि नए नाम से न केवल उनकी नकारात्मक छवि मिटेगी, बल्कि गांव की पहचान भी सकारात्मक रूप में बनेगी।





