BY
Yoganand Shrivastava
Khandwa जब ग्रहण के सूतक काल के दौरान अयोध्या के राम मंदिर से लेकर वाराणसी के घाटों तक सन्नाटा पसरा है, तब मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित ‘श्री दादाजी धूनीवाले’ मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खुले हुए हैं। विश्व प्रसिद्ध इस दरबार की यह विशेषता है कि यहाँ साल के 365 दिन और 24 घंटे भक्ति का प्रवाह बना रहता है। यहाँ ग्रहण की मान्यताओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पूजन-अर्चन की प्रक्रिया सामान्य दिनों की तरह ही जारी रहती है।
परंपराओं से परे: ग्रहण में भी जारी रहता है अखंड हवन और भोग
Khandwa श्री दादाजी मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह परंपरा स्वयं अवधूत संत दादाजी धूनीवाले के समय से चली आ रही है। मंदिर परिसर में स्थित ‘अखंड धूनी’ (हवन कुण्ड) में आहुतियां और दादाजी का भोग भंडार ग्रहण काल में भी स्थगित नहीं किया जाता। जहाँ अन्य मंदिरों में ग्रहण के दौरान स्पर्श तक वर्जित होता है, यहाँ श्रद्धालु निर्बाध रूप से दर्शन और परिक्रमा कर सकते हैं। भक्तों का विश्वास है कि दादाजी की आध्यात्मिक शक्ति के आगे ग्रहण का कोई भी नकारात्मक प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है।
अयोध्या और ओंकारेश्वर में पसरा सन्नाटा, बंद हुए पट
Khandwa एक ओर जहाँ खंडवा का दादाजी दरबार खुला है, वहीं इसी जिले में स्थित प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के कपाट दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण और विशेष आरती के उपरांत ही वहाँ दर्शन पुनः प्रारंभ होंगे। यही स्थिति रामनगरी अयोध्या की भी है, जहाँ राम लला के भव्य मंदिर सहित हनुमानगढ़ी और कनक भवन जैसे प्रमुख मठ-मंदिरों में सूतक लगते ही पर्दे गिरा दिए गए हैं।
2026 का सबसे बड़ा खगोलीय अवसर और धार्मिक सतर्कता
Khandwa 3 मार्च 2026 का यह चंद्र ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखने के कारण देश के लगभग सभी बड़े मंदिरों ने शास्त्रों के नियमों का पालन करते हुए दर्शन रोक दिए हैं। ऐसे में दादाजी धूनीवाले मंदिर की यह परंपरा न केवल शोध का विषय है, बल्कि उन लाखों अनुयायियों के लिए संबल भी है जो कठिन समय में भी ईश्वर के करीब रहना चाहते हैं।
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