ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने लंबे समय बाद सोशल मीडिया पर एक अहम संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि ईरान पर एक युद्ध थोपा गया था, लेकिन ईरानी राष्ट्र ने साहस, एकता और दृढ़ता के साथ उसका मुकाबला किया। इस संघर्ष ने न केवल देश की संप्रभुता को बचाए रखा, बल्कि पूरी दुनिया में ईरान की ताकत और सम्मान को भी उजागर किया।
ईरान की जनता ने दिखाई एकजुटता
खामेनेई ने कहा कि जब बाहरी ताकतों ने ईरान को युद्ध में घसीटा, तब ईरानी जनता पीछे नहीं हटी।
- लोग एकजुट होकर अपने देश के साथ खड़े रहे।
- बलिदान और समर्पण ने ईरान की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
- कठिन दौर में दिखाए गए साहस ने ईरान को वैश्विक स्तर पर मजबूती दी।
दुनिया के सामने आई ईरान की शक्ति
सुप्रीम लीडर ने अपने संदेश में जोर दिया कि ईरान की संप्रभुता को कोई भी विदेशी ताकत कमजोर नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा:
- युद्ध ने साबित किया कि ईरान आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र है।
- जनता और सेना के बलिदान ने सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की।
- इस संघर्ष ने पूरी दुनिया को ईरान की ताकत और जज्बे का परिचय कराया।
इजरायल-ईरान संघर्ष का जिक्र
बता दें कि हाल ही में इजरायल और ईरान के बीच करीब 12 दिनों तक भीषण युद्ध चला।
- अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया।
- इसके बावजूद ईरान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा में डटकर मुकाबला किया।
ईरान बना संघर्षशीलता की मिसाल
खामेनेई ने कहा कि ईरान की दृढ़ता ने विश्व समुदाय का ध्यान खींचा और कई देशों में उसके प्रति सम्मान बढ़ाया।
- ईरान ने न सिर्फ अपने लिए बल्कि दुनिया के उन लोगों के लिए भी मिसाल कायम की जो अन्याय और दमन के खिलाफ लड़ रहे हैं।
- देश ने अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।
- खामेनेई ने जनता और सेना की एकता को ईरान की सबसे बड़ी ताकत बताया।
सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति अडिग
अयातुल्ला खामेनेई का यह बयान स्पष्ट करता है कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में भी ईरान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहेगा। इस संदेश ने दुनिया को यह याद दिलाया है कि ईरान केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि संघर्ष और दृढ़ता का प्रतीक है।





