600 साल बाद फटा रूस का क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी, कामचटका में डबल डिजास्टर की दहशत

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600 साल बाद फटा रूस का क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी, कामचटका में डबल डिजास्टर की दहशत

रूस के सुदूर पूर्वी इलाके कामचटका प्रायद्वीप में हाल ही में आए 8.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद अब एक और प्राकृतिक संकट ने दस्तक दे दी है। करीब 600 वर्षों के सन्नाटे के बाद क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ है, जिससे राख का विशाल गुबार उठ रहा है और क्षेत्र में ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

600 साल बाद हुआ विस्फोट

रूसी सरकारी मीडिया और स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के ज्वालामुखी कार्यक्रम के अनुसार, क्रशेनिनिकोव आखिरी बार 1550 में फटा था। अब 2025 में, 6 सदी बाद इसका सक्रिय होना वैज्ञानिकों के लिए भी चौंकाने वाला है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में काले धुएं और राख के बादल आसमान की ओर उठते नजर आ रहे हैं।


भूकंप और सुनामी से पहले ही मचा था हड़कंप

इससे पहले, 30 जुलाई को कामचटका में आए भीषण 8.8 तीव्रता के भूकंप ने न सिर्फ रूस, बल्कि जापान, अमेरिका, हवाई, चिली और फ्रेंच पोलिनेशिया तक को हिला दिया था। भूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरें उठीं और तटीय इलाकों में अफरातफरी मच गई थी। रूस के बंदरगाहों पर पानी भर गया और लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।


ऑरेंज अलर्ट: हवाई यातायात पर असर

रूसी आपातकालीन मंत्रालय ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जो दर्शाता है कि हवाई यात्राओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। राख और धुएं के कारण फ्लाइट्स रद्द या डायवर्ट की जा रही हैं। राहत की बात यह है कि क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी के आसपास कोई बड़ा आबादी क्षेत्र नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह और अधिक विस्फोटों की शुरुआत हो सकती है।


वैज्ञानिकों की चेतावनी और राहत प्रयास

वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आपस में जुड़े हो सकते हैं। वे अब आफ्टरशॉक्स और अन्य ज्वालामुखियों की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी बड़ी आफ्टरशॉक्स आने की आशंका बनी हुई है।

रूस की सरकार और आपातकालीन विभाग ने ड्रोन निगरानी, राहत टीमों की तैनाती, और सैटेलाइट इमेजिंग के ज़रिए लगातार हालात पर नजर बनाए रखी है।


कामचटका: रूस का भूगर्भीय ‘हॉटस्पॉट’

कामचटका प्रायद्वीप भूगर्भीय दृष्टि से “रिंग ऑफ फायर” का हिस्सा है, जहां बड़ी संख्या में सक्रिय ज्वालामुखी स्थित हैं। यह इलाका अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों का केंद्र रहा है, लेकिन 600 साल बाद हुए इस विस्फोट ने वैश्विक वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है।


अभी टला नहीं है खतरा

कामचटका में प्राकृतिक आपदाओं की यह श्रृंखला फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही। वैज्ञानिकों और राहत एजेंसियों ने आने वाले दिनों में और भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। क्षेत्रीय प्रशासन ने एयर ट्रैफिक, मछुआरों और पर्यटकों को चेतावनी जारी कर दी है।

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