BY- ISA AHMAD
संवाददाता: रवि जैस्ट
कलायत अनाज मंडी में किसानों को उस समय भारी निराशा का सामना करना पड़ा जब उनकी लाई गई धान की फसल पर बोली शुरू ही नहीं हुई। किसान फसल लेकर सुबह से मंडी में मौजूद थे, लेकिन खरीदी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
नमी बनी सबसे बड़ी समस्या
सरकार ने धान खरीद के लिए अधिकतम 17% नमी की सीमा तय की है। लेकिन मंडी में किसानों द्वारा लाई गई धान में नमी का स्तर 20% से 25% तक पाया गया।
- सरकारी नियमों के तहत अधिक नमी वाली फसल की खरीद संभव नहीं है।
- व्यापारियों और राइस मिल मालिकों का कहना है कि अधिक नमी वाली फसल को कम दाम पर ही खरीदा जा सकता है, क्योंकि नमी घटने पर धान का वजन भी कम हो जाता है।
किसानों का गुस्सा और परेशानी
किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी फसल की पैदावार में मेहनत और समय लगाया, लेकिन अब उन्हें एमएसपी (MSP) से कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों ने मंडी परिसर में सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
किसानों की मांग
- सरकार नमी के मानकों में कुछ छूट दे।
- धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित की जाए।
- किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिले।
किसानों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा और आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल सकता है।





