BY: Yoganand Shrivastva
तेहरान: कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं पर इजरायली हमले के बाद इस्लामिक और अरब देशों में हलचल मच गई है। अब चर्चा इस बात की है कि इजरायल का अगला निशाना कौन होगा। तुर्की के अधिकारियों ने पहले ही आशंका जताई थी कि अंकारा अगला टारगेट हो सकता है, लेकिन अब ईरान के एक पूर्व जनरल ने हालात को और गंभीर बताते हुए कहा है कि तुर्की के साथ-साथ सऊदी अरब और इराक भी इजरायल के हमलों की जद में आ सकते हैं।
पूर्व ईरानी जनरल का बड़ा दावा
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सुस्ती परिषद (Expediency Discernment Council) के सदस्य और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व प्रमुख कमांडर मोहसिन रेज़ाई ने दावा किया कि इजरायल का हमला अब कतर तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तुर्की, इराक और सऊदी अरब पर भी इजरायल हमला कर सकता है।
रेज़ाई ने मुस्लिम देशों को चेतावनी देते हुए कहा,
“अगर OIC (इस्लामिक सहयोग संगठन) निर्णायक कदम नहीं उठाता, तो सऊदी अरब, तुर्की और इराक को भी बड़े हमलों का सामना करना पड़ेगा। इसका एकमात्र समाधान है—मुस्लिम देशों का एक सैन्य गठबंधन।”
दोहा में आपातकालीन OIC सम्मेलन
इजरायली हमले के बाद मुस्लिम देशों की सबसे बड़ी संस्था OIC का आपातकालीन सम्मेलन कतर में बुलाया गया है। इस बैठक का मकसद हालात पर चर्चा करना और इजरायल को कड़ी प्रतिक्रिया देना है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि इस समय मुस्लिम देशों को मिलकर एक मजबूत सैन्य मोर्चा बनाना चाहिए ताकि किसी भी बाहरी खतरे का सामना किया जा सके।
एकीकृत इस्लामी सेना का प्रस्ताव
मोहसिन रेज़ाई के बयान को ईरानी मीडिया में बड़ी अहमियत दी गई है। इस अपील को और मजबूती देते हुए ईरान के शिया धर्मगुरु जलाल रज़वी-मेहर, जो क़ोम (Qom) के प्रमुख सेमिनरी नेताओं में से एक हैं, ने भी मुस्लिम देशों से एक एकीकृत इस्लामी सेना बनाने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक मुस्लिम राष्ट्र एकजुट होकर सुरक्षा ढांचा तैयार नहीं करेंगे, तब तक ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव
दोहा पर हालिया हमला मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव को और गहरा कर गया है। तुर्की और सऊदी अरब पहले से ही क्षेत्रीय राजनीति में बड़े खिलाड़ी हैं, जबकि इराक लंबे समय से अस्थिर है। अब इन देशों के संभावित हमलों के निशाने पर आने की चर्चा ने पूरे इस्लामी विश्व को बेचैन कर दिया है।
OIC के लिए चुनौतीपूर्ण समय
OIC के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती है कि वह अपने सदस्य देशों को एकजुट कर पाए। अरब और इस्लामिक देशों के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद हैं। ऐसे में क्या मुस्लिम दुनिया एक मजबूत सैन्य गठबंधन बना पाएगी, यह देखने वाली बात होगी।





