BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi मिडिल-ईस्ट में जारी जंग अब केवल मिसाइलों और फाइटर जेट्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बेहद आक्रामक हो गई है। पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान पहुँचाने का दावा करने के बाद ईरान ने सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घेराबंदी शुरू कर दी है। जिम्बाब्वे स्थित ईरानी दूतावास के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, जिसमें ट्रंप की ‘खामोशी’ पर तंज कसा गया है।

New Delhi 24 घंटे में भारी नुकसान का दावा: “हवा में फुस्स” हुए अमेरिकी जेट
ईरानी सेना ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों के भीतर उन्होंने अमेरिकी वायुसेना के 2 फाइटर जेट, एक विशाल एयरक्राफ्ट और कई हेलीकॉप्टरों को मार गिराया है। इसके अलावा, अमेरिका के अत्याधुनिक MQ-9 रीपर ड्रोन और कई क्रूज मिसाइलों को भी ईरानी डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है। इस सैन्य बढ़त के बाद ईरान ने अमेरिका की वैश्विक साख पर चोट करते हुए लिखा— “ट्रंप, प्लीज कुछ तो बोलिये, हम बोर हो रहे हैं।”

New Delhi ट्रंप के दावों की उड़ रही धज्जियां?
कुछ समय पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया था कि ईरान की मिसाइल दागने और रक्षा करने की क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि, मौजूदा जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आ रही है। ईरान न केवल इजरायल के तेल-अवीव को निशाना बना रहा है, बल्कि मिडिल-ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी लगातार हमले कर रहा है। शुक्रवार को क्रैश हुए अमेरिकी फाइटर जेट का एक पायलट अभी भी लापता बताया जा रहा है, जो पेंटागन के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

New Delhi कूटनीतिक हलकों में मची खलबली
ईरानी दूतावास द्वारा किया गया यह ‘अपमानजनक’ पोस्ट कूटनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ माना जा रहा है, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब अमेरिका के मनोवैज्ञानिक दबाव में नहीं है। अमेरिका के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने जल्द ही कोई प्रभावी जवाब नहीं दिया, तो क्षेत्र में उसका प्रभाव तेजी से घट सकता है।
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