BY: Yoganand Shrivastva
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई बैठक को लेकर भारत की प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत ने इस मुलाकात का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे वैश्विक शांति बहाल करने का रास्ता निकलेगा।
भारत का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
“भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई शिखर वार्ता का स्वागत करता है। शांति की दिशा में उनका नेतृत्व सराहनीय है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत इस बैठक में हुई प्रगति को सकारात्मक मानता है और मानता है कि आगे की राह केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकल सकती है। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि पूरी दुनिया यूक्रेन संघर्ष का शीघ्र समाधान देखना चाहती है।
ट्रंप का बयान
बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने का सबसे बेहतर तरीका सीधे शांति समझौता करना है, न कि केवल अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) पर रुकना।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले वह “सीजफायर के बाद शांति समझौते” की बात कर रहे थे, लेकिन अब उनका मानना है कि प्रत्यक्ष शांति वार्ता ही स्थायी समाधान हो सकती है।
ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा:
“अलास्का में आज की बैठक बहुत सफल रही। राष्ट्रपति पुतिन के साथ वार्ता शानदार रही। इसके अलावा, मैंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, यूरोप के कई नेताओं और नाटो महासचिव से भी फोन पर बातचीत की। सभी का मानना है कि इस युद्ध को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका शांति समझौता है, क्योंकि सीजफायर अक्सर विफल हो जाता है।”
निष्कर्ष
अलास्का की इस बैठक ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह शांति प्रयासों का समर्थन करता है और मानता है कि बातचीत ही आगे का रास्ता है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या वास्तव में ट्रंप और पुतिन के बीच हुई यह वार्ता रूस–यूक्रेन युद्ध के अंत की दिशा में ठोस कदम साबित होगी या नहीं।





