Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को छह महीने से अधिक समय बीत चुका है और इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल गया है। ईरानी हमलों और सैन्य तनाव के कारण इस अहम जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद अमेरिका ने मंगलवार को एक बड़े सैन्य अभियान के जरिए करीब 1.8 करोड़ बैरल तेल ले जा रहे 40 वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित पार कराया।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 1 सितंबर को किया गया यह ऑपरेशन युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से तेल की इतनी बड़ी खेप के गुजरने का पहला बड़ा उदाहरण है। इस अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने जहाजों को सुरक्षा देने के साथ-साथ ईरानी सैन्य क्षमताओं को भी निशाना बनाया।
Hormuz: अमेरिका ने 40 जहाजों को दी सुरक्षा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे करीब 40 कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य बलों को तैनात किया गया था। इन जहाजों में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल मौजूद था और कुल मिलाकर करीब 1.8 करोड़ बैरल तेल इस समुद्री मार्ग से गुजरा।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब ईरान की ओर से समुद्री क्षेत्र में हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि सैन्य सुरक्षा के बिना इतने बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बेहद जोखिमपूर्ण हो सकती थी।
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में तेल का सुरक्षित तरीके से निकलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Hormuz: ड्रोन और मिसाइल हमलों से जहाजों की सुरक्षा
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने ड्रोन और अन्य सैन्य प्रणालियों की मदद से कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की। अमेरिकी दावे के मुताबिक, अभियान के दौरान ईरान की ओर से इस्तेमाल की जा रही एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को भी निष्क्रिय किया गया।
अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि तेल ले जाने वाले जहाज बिना किसी बड़े व्यवधान के होर्मुज पार कर सकें। इसके लिए समुद्री, हवाई और अन्य निगरानी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
Hormuz: ईरान के करीब 60 ठिकानों पर हमले का दावा
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, जहाजों की सुरक्षा के लिए किए गए अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने होर्मुज के आसपास ईरान से जुड़े करीब 60 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार प्रतिष्ठान, समुद्री सैन्य संसाधन, संचार केंद्र और माइन बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकाने शामिल होने का दावा किया गया।
अमेरिका की रणनीति का एक अहम हिस्सा ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है, जिससे होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों और समुद्री गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है।
Hormuz: होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका का दावा
अमेरिका इस पूरे अभियान को होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देख रहा है। अमेरिकी बलों का लक्ष्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ ईरान की समुद्री गतिविधियों पर दबाव बनाए रखना है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड को होर्मुज क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत ईरानी बंदरगाहों से तेल के निर्यात को रोकने और समुद्री मार्ग पर ईरानी सैन्य गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
इस रणनीति का सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि तेल निर्यात उसके लिए विदेशी मुद्रा आय का प्रमुख स्रोत है।
Hormuz: युद्ध से पहले रोज गुजरता था करीब 2 करोड़ बैरल तेल
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था। दुनिया के ऊर्जा कारोबार में इस जलमार्ग की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि यहां यातायात बाधित होने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे सकता है।
लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद सैन्य खतरे और जहाजों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के कारण इस रास्ते से शिपिंग गतिविधियां काफी घट गईं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और तेल की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिला।
अब अमेरिका की ओर से बड़ी संख्या में जहाजों को सुरक्षा देकर पार कराने की कार्रवाई को समुद्री यातायात बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Hormuz: तेल टैंकर पर हमले में दो क्रू सदस्यों की मौत
होर्मुज में जोखिम का अंदाजा हालिया टैंकर हमले से भी लगाया जा सकता है। सऊदी अरब के झंडे वाले एक कच्चे तेल के टैंकर पर सोमवार को हमला हुआ था। जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की तैयारी कर रहा था, तभी उसमें आग लग गई।
इस घटना में फिलीपींस के दो क्रू सदस्यों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य सदस्यों को बचा लिया गया। इस घटना के बाद समुद्री मार्ग से तेल परिवहन करने वाली कंपनियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई।
Hormuz: ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में भी बढ़ाए हमले
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों के खिलाफ भी हमले तेज करने का दावा किया गया है। बहरीन ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बुधवार तड़के ईरान की ओर से किए गए कई हवाई हमलों को नाकाम किया।
वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया में बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं। इससे खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।
Hormuz: होर्मुज में बढ़ता तनाव दुनिया के लिए चिंता क्यों?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही में लंबे समय तक रुकावट आने पर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इसका असर भारत समेत उन देशों पर भी पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करते हैं। तेल की कीमतों में तेज उछाल से परिवहन लागत, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान की सैन्य गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में खतरा बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात और तेल की आवाजाही पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
read also: Hormuz का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ करने की तैयारी? डोनाल्ड ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप


