Homeopathy for Humanity Award: सिलीगुड़ी में 11 जनवरी को आयोजित 7वें ग्लोबल आयुष समिट एवं अवॉर्ड समारोह में इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. ए.के. द्विवेदी को “होम्योपैथी फॉर ह्यूमैनिटी-एनीमिया केयर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें एनीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया के उपचार, शोध और जनजागरूकता अभियान में योगदान के लिए प्रदान किया गया।
Homeopathy for Humanity Award: मुख्य व्याख्यान में पेश की केस-सीरीज
डॉ. द्विवेदी ने समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में “एप्लास्टिक एनीमिया के नैदानिक परिणाम: केस-सीरीज आधारित होम्योपैथिक दृष्टिकोण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अप्लास्टिक एनीमिया से स्वस्थ हुए मरीजों की केस-सीरीज साझा की।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि होम्योपैथी ब्लड कैंसर, बोनमैरो विकारों और कैंसर उपचार के बाद पैनसाइटोपीनिया के प्रबंधन में भी बेहद प्रभावी साबित हो रही है।
आयुष चिकित्सा: मानवता और संवेदना का मेल
डॉ. द्विवेदी ने कहा, “आज जब दुनिया केवल दवा नहीं, बल्कि मानवीय उपचार खोज रही है, तब आयुष चिकित्सा आशा की किरण बनकर उभरी है। होम्योपैथी उपचार में संवेदना जोड़ती है, जिससे चिकित्सा केवल इलाज नहीं, बल्कि सेवा बन जाती है।”

तिल-गुड़ से स्वास्थ्य संदेश
मकर संक्रांति के अवसर पर डॉ. द्विवेदी ने तिल और गुड़ के स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “पूर्वजों का ज्ञान यही था कि तिल-गुड़ स्वयं भी खाएं और दूसरों को भी खिलाएं, ताकि समाज सामूहिक रूप से स्वस्थ रहे।”
CCRH सिलीगुड़ी यूनिट का दौरा
डॉ. द्विवेदी ने CCRH (Central Council for Research in Homoeopathy), सिलीगुड़ी यूनिट का दौरा कर अनुसंधान कार्यों, क्लीनिकल सेवाओं और अकादमिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने एविडेंस-बेस्ड प्रैक्टिस और रिकॉर्ड कीपिंग पर सार्थक संवाद किया। यह दौरा अनुसंधान और सेवा के समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

Homeopathy for Humanity Award: आयुष चिकित्सा को वैश्विक पहचान
CCRH सिलीगुड़ी केंद्र के प्रमुख डॉ. रंजीत सोनी ने बताया कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के प्रयासों से आयुष चिकित्सा को विश्व स्तर पर पहचान मिली है। वर्तमान में लगभग 25 देशों के साथ एमओयू किए जा चुके हैं।
विविधता में एकता
डॉ. त्यागी ने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियों की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता में एकता है। आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग, नैचुरोपैथी, सिद्धा और यूनानी सभी विधाएं मानव स्वास्थ्य के एक ही लक्ष्य के लिए कार्य करती हैं।

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Homeopathy for Humanity Award: प्रमाण-आधारित प्रैक्टिस की आवश्यकता
डॉ. विकास सिंघल ने जोर दिया कि आयुष चिकित्सा को और प्रभावी बनाने के लिए प्रमाण-आधारित प्रैक्टिस अपनाना आवश्यक है। चिकित्सकों को केवल लक्षणों पर नहीं बल्कि क्लिनिकल डेटा, रिपोर्ट और फॉलोअप को भी महत्व देना चाहिए।





