BY: MOHIT JAIN
ग्वालियर से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनें, जो 100-130 किमी/घंटे की रफ्तार का दावा करती हैं, फिलहाल 11 से 47 किमी/घंटे की धीमी गति से चल रही हैं। यात्री तो मजाक में कहने लगे हैं कि साइकिल से निकलना शायद जल्दी होता।
रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार, बरौनी-ग्वालियर एक्सप्रेस को झांसी से ग्वालियर (98 किमी) पहुँचने में तीन घंटे लगते हैं, वहीं इटावा-कोटा एक्सप्रेस को शनिश्चरा से ग्वालियर (18 किमी) तक पहुँचने में 1 घंटा 23 मिनट का समय लगता है।
तीसरी लाइन और प्लेटफार्म विस्तार से होगा सुधार
रेलवे अफसरों का कहना है कि ग्वालियर स्टेशन पर अभी केवल चार प्लेटफार्म हैं। जब झांसी, आगरा और शिवपुरी की ओर से ट्रेनें एक साथ आती हैं, तो उन्हें आउटर प्लेटफॉर्म पर रोकना पड़ता है।
- धौलपुर से बीना सेक्शन में तीसरी लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है।
- ग्वालियर स्टेशन पर दो नए प्लेटफार्म का निर्माण तेजी से चल रहा है।
- ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम भी फाइनल स्टेज में है।
इन सुधारों से अगले चार महीनों में 9 एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
यात्रियों को मिलेगा असली एक्सप्रेस अनुभव

भास्कर एक्सपर्ट और रिटायर्ड स्टेशन प्रबंधक पीपी चौबे के अनुसार, रेलवे को अब समय-सारणी में बदलाव करना होगा और एलएचबी कोच वाली ट्रेनों के हिसाब से नया टाइम टेबल तैयार करना होगा।
अगर प्लेटफार्म और सिग्नलिंग सिस्टम का काम वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा हो जाता है, तो 2026 से ग्वालियर स्टेशन पर यात्रियों को असली ‘एक्सप्रेस स्पीड’ का अनुभव मिलेगा।





