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Gwalior Central Library: जहां कभी लगती थी रियासतकालीन अदालत, आज ज्ञान का केंद्र

Gwalior Central Library

Gwalior Central Library: आज ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी युवाओं के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र है, लेकिन करीब 100 वर्ष पहले यही इमारत रियासतकालीन न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा थी। इतिहासकारों के अनुसार, इस भवन की ऊपरी मंजिल पर गंभीर मामलों की सुनवाई के लिए अदालत लगती थी।

Gwalior Central Library: कभी यहां लगती थी न्याय की अदालत

रियासत काल में इस इमारत को न्यायालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। बड़े और गंभीर मामलों की सुनवाई यहीं होती थी। दूसरी मंजिल पर न्यायाधीश बैठते थे और फैसले सुनाए जाते थे।

नीचे थीं सजायाफ्ता कैदियों की काल कोठरियां

अदालत के ठीक नीचे निचले हिस्से में खतरनाक और सजायाफ्ता कैदियों को रखने के लिए काल कोठरियां बनाई गई थीं। इन कोठरियों के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जिन्हें देखने के लिए पर्यटक भी पहुंचते हैं।

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न रोशनी, न हवा-क्रूर सजाओं की गवाही

इन काल कोठरियों में सूरज की रोशनी पहुंचना तो दूर, हवा का प्रवाह भी बेहद सीमित था। ऑक्सीजन की कमी के कारण कैदी मानसिक और शारीरिक रूप से टूट जाते थे। गर्मियों में हालात और भी भयावह हो जाते थे।

पत्थरों से बनी मजबूत इमारत

इस भवन की दीवारें, छत और दरवाजे तक पत्थरों से बने हुए हैं। लोहे और पत्थर के भारी दरवाजों को खोलना किसी एक व्यक्ति के लिए लगभग नामुमकिन था। सजा पूरी होने से पहले यहां से बाहर निकलना बेहद कठिन माना जाता था।

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Gwalior Central Library: 1928 में बनी सेंट्रल लाइब्रेरी

सेंट्रल लाइब्रेरी के प्रबंधक विवेक कुमार सोनी के अनुसार, वर्ष 1928 में इस ऐतिहासिक भवन को पुस्तकालय का रूप दिया गया। तभी से यह स्थान ज्ञान का केंद्र बन गया।

आज भंडार गृह के रूप में हो रहा उपयोग

ऑक्सीजन की कमी के चलते अब इन काल कोठरियों का उपयोग भंडार गृह के तौर पर किया जा रहा है, जहां सैकड़ों साल पुराने दुर्लभ साहित्य और किताबों को सुरक्षित रखा गया है।

Gwalior Central Library

डिजिटल रूप में बदली ऐतिहासिक धरोहर

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इस लगभग 100 साल पुराने पुस्तकालय का नवीनीकरण किया गया। पुरानी पुस्तकों की स्कैनिंग कर उन्हें डिजिटल माध्यम से छात्रों और शोधार्थियों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

संविधान की मूल प्रति भी है यहां सुरक्षित

ग्वालियर सेंट्रल लाइब्रेरी में भारतीय संविधान की 16 मूल प्रतियों में से एक प्रति आज भी संरक्षित है। यह प्रति 31 मार्च 1956 को ग्वालियर लाई गई थी। इसमें 231 पृष्ठ हैं और संविधान समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से अब इसे केवल डिजिटल स्क्रीन पर ही प्रदर्शित किया जाता है।

इतिहास और आधुनिक तकनीक का यह संगम ग्वालियर सेंट्रल लाइब्रेरी को एक जीवित विरासत के रूप में पहचान दिलाता है।

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