Guna मध्य प्रदेश के गुना जिले में न्याय की आस खो चुके ग्रामीणों का एक दर्दनाक चेहरा सामने आया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब जगनपुर चक निवासी कुछ ग्रामीण अपने गले में ‘इच्छा मृत्यु’ की तख्ती लटकाकर जनसुनवाई में पहुँच गए। बुंदेल सिंह, बलराम सिंह और उनके साथ आईं सहरिया समुदाय की महिलाओं (कमरबाई और शरदबाई) ने प्रशासन के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि अब उनके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
प्रशासनिक मिलीभगत और ‘सर्वे नंबर’ का खेल
Guna पीड़ित ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि स्थानीय पटवारी और दबंग भू-माफियाओं ने आपस में सांठगांठ कर ली है। ग्रामीणों के अनुसार, उनकी कीमती जमीन नगर तहसील के सर्वे क्रमांक 25/3 में दर्ज है। लेकिन भू-माफियाओं को फायदा पहुँचाने के लिए पटवारी ने कथित तौर पर दस्तावेजों में हेराफेरी की और उनकी जमीन का वास्तविक स्थान बदलकर उसे कहीं और (पीछे की ओर) दर्शाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इसी तकनीकी खेल की आड़ में दबंगों ने उनकी पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जा जमा लिया है।

विकास की आहट और जमीनों पर कब्जे की होड़
Guna जगनपुर इलाके में विवाद बढ़ने का मुख्य कारण यहाँ तेजी से हो रहा सरकारी निर्माण है। इस क्षेत्र में वर्तमान में पीएम आवास कॉलोनी, न्यायालय परिसर, एसडीएम कार्यालय और स्कूल जैसी बड़ी इमारतें बन रही हैं। विकास कार्यों की वजह से इस इलाके की जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। चूंकि यहाँ की अधिकांश जमीनें आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों की हैं, इसलिए भू-माफिया सरकारी तंत्र के साथ मिलकर इन बेशकीमती जमीनों को हड़पने की साजिश रच रहे हैं।
कलेक्टर को चेतावनी: “दिल्ली तक करेंगे पदयात्रा”
Guna जनसुनवाई में आवेदन देने के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति अपना गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उनका आरोप है कि मदद करने के बजाय स्थानीय अधिकारी उन्हें ही धमका रहे हैं। प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने अब कलेक्टर से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। साथ ही, पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी जमीन को दबंगों से मुक्त नहीं कराया गया, तो वे दिल्ली तक पदयात्रा करेंगे और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष अपनी व्यथा रखेंगे।





