गोवा के शिरगांव गांव स्थित प्रसिद्ध श्री लैराई देवी मंदिर में आयोजित वार्षिक ज़ात्रा उत्सव के दौरान शनिवार तड़के भीषण भगदड़ मच गई। इस दुर्घटना में कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है और घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
हादसे की मुख्य बातें:
- यह हादसा शनिवार तड़के उत्तरी गोवा के शिरगांव गांव में हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
- भगदड़ का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
- मृतकों में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। आठ लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
- दो घायलों को गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (बांबोलीम) रेफर किया गया है।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने की अस्पताल में घायलों से मुलाकात
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने मापुसा स्थित उत्तर गोवा जिला अस्पताल का दौरा कर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “लैराई ज़ात्रा में हुई इस दुखद घटना से मन अत्यंत व्यथित है। मैंने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है और हालात पर खुद नजर बनाए हुए हूं।”
पीएम मोदी ने किया मुख्यमंत्री से संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और मुख्यमंत्री सावंत से फोन पर बात की। उन्होंने स्थिति की पूरी जानकारी ली और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। पीएम मोदी ने कहा, “शिरगांव, गोवा में भगदड़ के कारण हुई जनहानि से बेहद दुखी हूं। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

स्वास्थ्य मंत्री की जानकारी
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने बताया कि मृतकों में दो पुरुष और दो महिलाएं हैं जिन्हें अस्पताल लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि पांच एंबुलेंस मौके पर तुरंत भेजी गईं और अतिरिक्त तीन अस्पताल में स्टैंडबाय पर रखी गई हैं।
उन्होंने कहा, “सभी घायलों की स्थिति की निगरानी की जा रही है। गोवा मेडिकल कॉलेज और आसिलो अस्पताल के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गंभीर मरीजों के लिए विशेष आईसीयू और वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई है।”
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली सक्रिय कर दी गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी चिकित्सा इंतजाम पूरी तरह से कर लिए गए हैं और हर मरीज की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है।
निष्कर्ष:
लैराई देवी ज़ात्रा के दौरान हुई यह घटना अत्यंत दुखद है, जो धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपायों की गंभीर आवश्यकता को रेखांकित करती है। सरकार और प्रशासन ने राहत कार्य में तत्परता दिखाई है, लेकिन भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है।





