BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली, चुनाव आयोग ने विपक्ष द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग किसी पक्ष या विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि सभी को बराबरी से देखता है। रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने कहा, “हाल ही में देखा गया कि मतदाताओं की तस्वीरें और जानकारी बिना उनकी अनुमति के सार्वजनिक की गईं। उन पर सवाल उठाए गए और आरोप लगाए गए। क्या चुनाव आयोग किसी की मां, बहू या बेटी के CCTV फुटेज मीडिया में जारी कर सकता है? जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं, वही वोट देने के हकदार हैं।”
“संविधान का अपमान है ये”
मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी त्रुटि की शिकायत समय रहते दर्ज नहीं की जाती, या फिर तय अवधि (45 दिन) में हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल नहीं होती, तो बाद में ‘वोट चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह करना सीधे-सीधे भारत के संविधान का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं की पहचान और तस्वीरें सार्वजनिक करना उनकी निजता का गंभीर उल्लंघन है।
राहुल गांधी को EC का अल्टीमेटम
चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चेतावनी दी है कि वे सात दिनों के भीतर शपथपत्र (हलफनामा) देकर अपने आरोपों को प्रमाणित करें, अन्यथा यह माना जाएगा कि उनके आरोप निराधार हैं। आयोग ने साफ कहा कि राहुल गांधी के पास दो ही विकल्प हैं—या तो सबूतों के साथ हलफनामा दें या फिर सार्वजनिक रूप से माफी माँगें।
राहुल गांधी का आरोप क्या था?
राहुल गांधी ने दावा किया था कि चुनाव के दौरान पोलिंग बूथ के CCTV और वीडियो रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की गई। उन्होंने पूछा था कि विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा रही? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई और विपक्षी नेताओं को धमकाया गया। राहुल ने सीधे सवाल किया था कि “क्या चुनाव आयोग अब भाजपा का एजेंट बन चुका है?”
EC का स्पष्टीकरण
राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट किया था कि एक लाख पोलिंग बूथ के CCTV फुटेज की समीक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। आयोग ने कहा था, “इतनी फुटेज देखने में करीब एक लाख दिन यानी 273 साल लगेंगे, और उसका कोई कानूनी महत्व भी नहीं है। कानून के अनुसार CCTV फुटेज केवल तब सुरक्षित रखी जाती है जब कोई उम्मीदवार चुनाव परिणाम के खिलाफ याचिका दायर करे।”





