पिछले एक साल में खाद्य तेल की कीमतें आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही थीं। लेकिन अब एक बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने सूरजमुखी, सोया और पाम तेल जैसे प्रमुख खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाकर 20% से 10% कर दिया है। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। सरकार ने तेल कंपनियों को एमआरपी घटाने के निर्देश भी दिए हैं।
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🛢️ क्या बदला है खाद्य तेल के नियमों में?👉 आयात शुल्क में 50% की कटौती🏭 कंपनियों को दिए गए निर्देश📌 उपभोक्ताओं को तुरंत लाभ देने की मांग📉 महंगाई पर नियंत्रण की कोशिशपिछले 1 साल में खाद्य तेलों की कीमतों में भारी वृद्धि📆 कब हुई थी आयात शुल्क में कटौती?📝 सरकार का उद्देश्य📢 क्या है आगे की रणनीति?📲 निष्कर्ष: आम आदमी को राहत, कंपनियों को चेतावनी
🛢️ क्या बदला है खाद्य तेल के नियमों में?
👉 आयात शुल्क में 50% की कटौती
- पहले: कच्चे सूरजमुखी, सोया और पाम तेल पर 20% आयात शुल्क था
- अब: इसे घटाकर 10% कर दिया गया
- इससे कच्चे और रिफाइंड तेल के बीच का आयात शुल्क अंतर 8.75% से बढ़कर 19.25% हो गया है
- यह कदम घरेलू रिफाइनिंग को बढ़ावा देगा और विदेश से रिफाइंड तेल के आयात को घटाएगा
🏭 कंपनियों को दिए गए निर्देश
📌 उपभोक्ताओं को तुरंत लाभ देने की मांग
- खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने तेल उत्पादक कंपनियों और एसोसिएशनों के साथ बैठक की
- निर्देश दिए गए कि तुरंत MRP में कटौती करें
- ब्रांडवार MRP रिपोर्ट साप्ताहिक रूप से मंत्रालय के साथ साझा करने को कहा गया
- एक विशेष रिपोर्टिंग फॉर्मेट भी उपलब्ध कराया गया है
📉 महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
पिछले 1 साल में खाद्य तेलों की कीमतों में भारी वृद्धि
| तेल का प्रकार | जून 2024 कीमत | जून 2025 कीमत | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| वनस्पति तेल | ₹126/L | ₹155/L | +23% |
| सोया तेल | ₹123/L | ₹147/L | +20% |
| सूरजमुखी तेल | ₹123/L | ₹160/L | +30% |
| पाम तेल | ₹100/L | ₹132/L | +32% |
| सरसों तेल | ₹138/L | ₹172/L | +25% |
कुछ शहरों में ये कीमतें और भी अधिक दर्ज की गई हैं।
📆 कब हुई थी आयात शुल्क में कटौती?
- तारीख: 31 मई 2025
- सरकार ने उसी दिन सूरजमुखी, सोया और पाम तेल पर 50% सीमा शुल्क में कमी की घोषणा की थी
- अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी को बढ़ावा देने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लिया गया
📝 सरकार का उद्देश्य
- घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ता तेल मुहैया कराना
- रिफाइंड तेल का आयात घटाना
- घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को मजबूत करना
- कंपनियों को जवाबदेह बनाना कि आयात शुल्क में कटौती का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे
📢 क्या है आगे की रणनीति?
- सरकार हर सप्ताह MRP और कीमतों की समीक्षा करेगी
- यदि कंपनियों ने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो आगे कठोर कदम उठाए जा सकते हैं
- उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे तेल खरीदते समय MRP पर ध्यान दें और बढ़े हुए दाम की शिकायत करें
📲 निष्कर्ष: आम आदमी को राहत, कंपनियों को चेतावनी
इस फैसले से जहां एक ओर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं कंपनियों पर सरकार की नजर भी बनी रहेगी। यह कदम देश में महंगाई पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।





