by: vijay nandan
क्रिप्टो करेंसी बाजार ने मंगलवार को निवेशकों को बड़ा झटका दिया, जब बिटकॉइन 7 महीने बाद 90,000 डॉलर के नीचे फिसल गया। साथ ही Ethereum, BNB, Solana, XRP और अन्य प्रमुख क्रिप्टो टोकन भी भारी गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे। बाजार सेंटिमेंट इतनी तेजी से बदला कि Crypto Fear & Greed Index ‘Extreme Fear’ जोन में पहुंच गया। इस गिरावट से निवेशकों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि क्रिप्टो मार्केट की ये गिरावट अचानक नहीं आई है, इसके पीछे कई आर्थिक, तकनीकी और सेंटीमेंटल फैक्टर्स काम कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि इतने बड़े उथल-पुथल की वजह क्या हैं।
- ETF आउटफ्लो: संस्थागत निवेशकों का तेजी से बाहर निकलना
क्रिप्टो में सबसे बड़ा भरोसा उन संस्थागत निवेशकों पर टिका होता है जो ETFs के जरिए भारी मात्रा में निवेश करते हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार Spot Bitcoin ETFs से बड़ा आउटफ्लो देखने को मिला है।

- जब ETF निवेशक पैसा तेजी से निकालते हैं तो
- बाजार की तरलता कम होती है,
- बिकवाली का दबाव बढ़ता है,
- कीमतें तेजी से नीचे गिरती हैं।
ETF से होने वाले ये आउटफ्लो संकेत देते हैं कि बड़े निवेशक लंबी अवधि के लिए सतर्क हो गए हैं।
- मार्केट में बड़ी शॉर्ट पोज़ीशन का जमाव
क्रिप्टो बाजार हमेशा वोलाटाइल होता है और ट्रेडर्स अक्सर शॉर्ट पोज़ीशन लेते हैं ताकि गिरावट से मुनाफा कमा सकें।
हाल ही में बिटकॉइन और अन्य ऑल्टकॉइन्स पर भारी शॉर्ट पोज़ीशन बना ली गई, जिसके कारण छोटे उतार-चढ़ाव भी तेजी से बड़ी गिरावट में बदल गए
- फ्यूचर्स मार्केट में लिक्विडेशन हुई
- कीमतें और तेजी से नीचे चली गईं
- यह एक चेन-रिएक्शन की तरह काम करता है
- जैसे ही कीमत गिरती है, शॉर्ट्स एक्टिव होते हैं और मार्केट और फिसलता जाता है।
- तरलता में भारी गिरावट: बाजार में पैसा कम
क्रिप्टो मार्केट की बुनियादी मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि बाजार में तरलता कितनी है।
हाल के हफ्तों में
- एक्सचेंजों पर खरीदारों की संख्या घटी
- ऑर्डर बुक में वॉल्यूम कम हुआ
- बड़े वॉलेट्स ने ट्रेडिंग कम की
- कम तरलता का असर यह हुआ कि थोड़ी-सी बिकवाली भी भारी क्रैश में बदल गई।
- ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक दबाव: ब्याज दरें और डॉलर की मजबूती
- दुनिया भर में आर्थिक माहौल स्थिर नहीं है।
- कई देशों में महंगाई का दबाव
- अमेरिका द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने के संकेत
- डॉलर इंडेक्स की मजबूती
ये सभी फैक्टर्स मिलकर क्रिप्टो जैसे हाई-रिस्क एसेट्स पर प्रेशर बनाते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं, जैसे गोल्ड, बॉन्ड्स और ट्रेजरी बिल्स। क्रिप्टो स्वाभाविक रूप से जोखिम वाला निवेश माना जाता है, इसलिए मैक्रो पॉलिसी टाइट होने पर बिकवाली बढ़ती है।
- मार्केट सेंटिमेंट ‘Extreme Fear’ में: घबराहट ने बढ़ाया प्रेशर
क्रिप्टो मार्केट का एक बड़ा हिस्सा भावनाओं पर चलता है।
जैसे ही कीमतें गिरती हैं, छोटे निवेशक घबरा जाते हैं।
- panic selling शुरू हो जाती है
- सोशल मीडिया फियर को और बढ़ा देता है।
- यह गिरावट के सिलसिले को तेज कर देता है।
इस समय इंडस्ट्री ‘Extreme Fear’ मोड में है, जो बताता है कि बाजार विश्वास खो रहा है और निवेशक कैश निकाल रहे हैं। क्या आगे भी जारी रहेगी यह गिरावट ? विश्लेषकों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में बाजार और दबाव में रह सकता है। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि..
- बिटकॉइन की दीर्घकालिक संरचना मजबूत है।
- संस्थागत निवेश फिर से लौट सकते हैं।
- बाजार सुधार की ओर जा सकता है।
फिलहाल जोखिम बना हुआ है और निवेशकों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए। क्रिप्टो मार्केट की इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई फैक्टर्स का संयुक्त असर है, ETF आउटफ्लो, शॉर्ट पोज़ीशन, कम तरलता, आर्थिक दबाव और घबराहट। बाजार फिलहाल संवेदनशील है और अगले कुछ दिनों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।





