Mohit Jain
Earth Time Hour: पृथ्वी पर समय को लेकर हमारी अब तक की समझ आने वाले भविष्य में पूरी तरह बदल सकती है। वैज्ञानिकों के नए और चौंकाने वाले शोध के मुताबिक, वह दिन दूर नहीं जब धरती पर एक दिन 24 नहीं बल्कि 25 घंटे का होगा। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक गणनाओं और वर्षों की रिसर्च पर आधारित निष्कर्ष है। जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की घूर्णन गति को लेकर यह अहम जानकारी सामने रखी है।
Earth Time Hour: अभी 24 घंटे का दिन, लेकिन यह स्थायी नहीं
आज हम जिस 24 घंटे के दिन को सामान्य मानते हैं, वह वास्तव में स्थिर नहीं है। पृथ्वी की घूर्णन गति में बेहद सूक्ष्म लेकिन लगातार बदलाव हो रहे हैं। धरती के भीतर मौजूद ठोस और तरल परतें, महासागरों की हलचल, चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव और जलवायु परिवर्तन-ये सभी मिलकर पृथ्वी की घूमने की रफ्तार को प्रभावित करते हैं।
TUM का शोध क्यों है खास
TUM के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के घूर्णन को मापने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। विश्वविद्यालय के जियोडेटिक वेधशाला वेटजेल में मौजूद रिंग लेजर जाइरोस्कोप नामक उपकरण धरती के घूमने की गति को असाधारण सटीकता से मापता है। यह उपकरण जमीन से करीब 20 फीट नीचे एक विशेष दबावयुक्त कक्ष में लगाया गया है, ताकि बाहरी कंपन और प्रभावों से बचा जा सके।

कैसे मापा जाता है पृथ्वी का समय
लेजर और दर्पणों की मदद से यह उपकरण पृथ्वी के घूर्णन में होने वाले बेहद छोटे बदलावों को भी पकड़ लेता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि लेजर फ्रीक्वेंसी में माइक्रोहर्ट्स स्तर का उतार-चढ़ाव भी इस बात का संकेत देता है कि पृथ्वी की रफ्तार में कितना परिवर्तन हुआ है। भूमध्य रेखा पर पृथ्वी प्रति घंटे लगभग 15 डिग्री घूमती है और वहां रोज़ औसतन 348.5 हर्ट्स की फ्रीक्वेंसी रिकॉर्ड की जाती है।
Earth Time Hour: पहले भी बदल चुका है दिन का समय
यह पहली बार नहीं है जब पृथ्वी पर दिन की अवधि बदली हो। वैज्ञानिकों के अनुसार, डायनासोर के समय एक दिन लगभग 23 घंटे का होता था, जबकि करीब 1.4 अरब साल पहले एक दिन सिर्फ 18 घंटे 41 मिनट का था। यह साफ दिखाता है कि समय के साथ पृथ्वी की घूर्णन गति लगातार धीमी होती जा रही है।
Earth Time Hour: कब होगा एक दिन 25 घंटे का
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 25 घंटे का दिन कब आएगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसमें अभी बहुत वक्त है। मौजूदा गणनाओं के मुताबिक, करीब 20 करोड़ साल बाद पृथ्वी पर एक दिन 25 घंटे का हो जाएगा। यह बदलाव इतना धीमा होगा कि मानव जीवन पर इसका सीधा असर महसूस नहीं होगा, लेकिन खगोल विज्ञान और समय मापन के लिए यह बेहद अहम होगा।

Earth Time Hour: क्यों है यह जानकारी महत्वपूर्ण
वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी के रोटेशन में होने वाले बदलाव सिर्फ खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं हैं। इससे सटीक जलवायु मॉडल तैयार करने, अल नीनो जैसी मौसमी घटनाओं को बेहतर समझने और भविष्य की भविष्यवाणी को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिलती है। समय की यह बदलती चाल विज्ञान के लिए एक नई दिशा खोलती है।
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धरती के घूमने की गति को लेकर यह शोध हमें यह समझाता है कि समय कोई स्थिर अवधारणा नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ लगातार बदलने वाली प्रक्रिया है।
यह कहा जा सकता है कि विज्ञान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि धरती सिर्फ घूम नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे समय की परिभाषा भी बदल रही है। आने वाले करोड़ों सालों में एक अतिरिक्त घंटा शायद सामान्य हो जाए, लेकिन आज यह जानकारी अपने आप में बेहद रोचक और ऐतिहासिक है।





