रिपोर्टर -आगस्टीन हेम्बरम
Dumka झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी दुमका के रानीश्वर प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर गांव में संताल आदिवासी समुदाय ने अपनी परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। समाजसेवियों और ग्रामीणों की संयुक्त पहल पर गांव के पारंपरिक पूजा स्थल ‘मांझी थान’ में सामूहिक साप्ताहिक पूजा (बोंगा बुरु) की विधिवत शुरुआत की गई है।

Dumka पारंपरिक रीति-रिवाजों से गूंजा मांझी थान
साप्ताहिक पूजा के पहले दिन गांव के पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भारी संख्या में मांझी थान में एकत्र हुए। समाज के आराध्य देव ‘मरांग बुरु’ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने धूप, अगरबत्ती, जल, गुड़, चूड़ा और लड्डू अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पारंपरिक मंत्रोच्चार और पूजा पद्धतियों का पालन किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया।

Dumka युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का संकल्प
इस पहल के मुख्य सूत्रधार समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन, आनंद टुडू और संजय मुर्मू ने बताया कि वर्तमान समय में अपनी भाषा, संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
- सामुदायिक एकता: साप्ताहिक पूजा का उद्देश्य समाज के लोगों को एक सूत्र में पिरोना है।
- सांस्कृतिक विरासत: नई पीढ़ी और बच्चों को अपने गौरवशाली इतिहास और रीति-रिवाजों से अवगत कराना है ताकि वे अपनी पहचान पर गर्व कर सकें।
- सामाजिक मजबूती: यह आयोजन भविष्य में संताल समाज को धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएगा।
Dumka नशा मुक्ति और शिक्षा का संदेश
पूजा के दौरान केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं हुए, बल्कि बच्चों और युवाओं को जीवन के सकारात्मक मूल्यों के प्रति प्रेरित करने के लिए विशेष प्रार्थना (विनती) की गई। ग्रामीणों को नशापान से दूर रहने, बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और बुजुर्गों का सम्मान करने का संकल्प दिलाया गया। समाजसेवियों का मानना है कि आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ सामाजिक सुधार ही इस पहल की असली सफलता होगी।
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