रिपोर्टर -आगस्टीन हेम्बरम
Dumka झारखंड के दुमका जिले अंतर्गत गोपीकांदर प्रखंड के खड़ीबाड़ी गांव स्थित पहाड़िया टोला में पेयजल की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। लगभग 50 पहाड़िया आदिवासी परिवारों वाले इस टोला में पिछले एक-दो वर्षों से स्वच्छ पानी का घोर अभाव है, जिससे ग्रामीणों का जीवन नर्क बन गया है।

Dumka दिखावा साबित हो रहे 5 चापाकल और सोलर टंकियां
ग्रामीणों के अनुसार, टोला में कहने को तो 5 चापाकल और 2 सोलर जल टंकियां स्थापित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है:
- सभी 5 चापाकल: पिछले 1 से 2 वर्षों से पूरी तरह खराब पड़े हैं।
- सोलर टंकियां: दो में से एक टंकी पिछले दो साल से बंद है, जबकि दूसरी भी तकनीकी खराबी के कारण पर्याप्त पानी नहीं दे पा रही है।
- आंगनबाड़ी केंद्र: यहाँ एक साल पहले नल और टंकी तो लगा दी गई, लेकिन आज तक पाइपलाइन से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है।
झरने का ‘जहरीला’ पानी पीने की मजबूरी
साफ पानी न मिलने के कारण पहाड़िया परिवारों को करीब एक किलोमीटर दूर जंगल और पथरीले रास्तों से होकर खेत के पास स्थित झरने और कुएं से पानी लाना पड़ता है।

स्वास्थ्य पर खतरा: ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषित पानी के सेवन से टोला में सर्दी, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। साथ ही, ऊबड़-खाबड़ रास्तों से पानी ढोने के कारण बुजुर्गों और महिलाओं के साथ दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
Dumka प्रशासनिक लापरवाही: आवेदन के बाद भी समाधान नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि दो महीने पहले प्रखंड कार्यालय में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई गई थी। आवेदन के बाद मिस्त्री गांव का मुआयना करने भी आए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अविलंब खराब चापाकलों की मरम्मत कराई जाए और आंगनबाड़ी केंद्र में पानी की आपूर्ति शुरू की जाए।
Dumka मौके पर मौजूद रहे ग्रामीण
इस विरोध और मांग के दौरान रमेश देहरी, राजेश कुंवर, दुर्गी महारानी, सुकली महारानी, लीलावती महारानी, रूपी महारानी, शांति महारानी, फुलमुनी महारानी, प्रिया कुमारी, रामजीत देहरी, लाखिंदर देहरी और अर्जुन देहरी सहित बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष उपस्थित थे।
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