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इजरायली सीमा में अनजाने में घुसे कई देशों के राजनयिक, आईडीएफ की गोलीबारी से मचा हड़कंप

BY: Yoganand Shrivastva

जेनिन/यरुशलम: वेस्ट बैंक के जेनिन शरणार्थी शिविर का दौरा कर रहे करीब 30 देशों के राजनयिक उस समय अचानक संकट में फंस गए जब वे गलती से इजरायली सैन्य अभियान वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गए। वहां मौजूद इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने गोलियां चलानी शुरू कर दी, जिससे राजनयिकों को जान बचाकर भागना पड़ा।

हालांकि किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना का वीडियो सामने आया है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य गोलियों की आवाज़ सुनते ही सुरक्षित स्थान की तलाश में इधर-उधर भाग रहे हैं।

घटना के पीछे की स्थिति

यह दौरा यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों द्वारा जेनिन क्षेत्र में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों के मानवीय प्रभावों का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन उस समय इलाके में इजरायली सेना और फिलिस्तीनी गनमैन के बीच मुठभेड़ चल रही थी। ऐसे में, यह प्रतिनिधिमंडल अनजाने में इस संघर्ष के बीच फंस गया।

चश्मदीदों के अनुसार जैसे ही गोलीबारी शुरू हुई, सुरक्षा बलों ने राजनयिकों को तत्काल सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया। बाद में सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

फिलिस्तीन और यूरोपीय प्रतिक्रिया

फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “जानबूझकर किया गया और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ” बताया। वहीं यूरोपीय संघ ने गहरी चिंता जाहिर की है और कहा है कि राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर इस तरह की घटनाएं मानवीय कार्यों को और मुश्किल बना देती हैं।

एक प्रवक्ता ने कहा, “इस क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति जरूरी है, लेकिन जब सुरक्षा खतरे में हो, तो हालात और गंभीर हो जाते हैं।”

इजरायली सेना की सफाई

IDF (इजरायली डिफेंस फोर्स) ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि जेनिन क्षेत्र में हाल ही में चरमपंथी गतिविधियों में वृद्धि हुई है, और ऐसे में वहां सैन्य अभियान चलाना आवश्यक था।

हालांकि फिलिस्तीनी पक्ष का कहना है कि यह महज आतंकवाद रोधी कार्रवाई नहीं बल्कि अत्यधिक बल प्रयोग और नागरिकों को निशाना बनाने जैसा है।

भारतीय राजनयिक शामिल नहीं थे

इस प्रतिनिधिमंडल में भारत के किसी भी राजनयिक की उपस्थिति नहीं थी। भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस दौरे में भारत का कोई प्रतिनिधि नहीं था।

फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा समेत 20 से अधिक देशों के राजनयिक इस आधिकारिक मिशन पर थे, जो कि जेनिन शरणार्थी शिविर में मौजूदा मानवीय हालात की समीक्षा करने पहुंचे थे।

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