रिपोर्टर – वैभव चौधरी
धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र के ग्राम नारधा में शासकीय भूमि पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और ग्रामीणों को हिला कर रख दिया है। इस मामले में करीब 10 एकड़ शासकीय जमीन को फर्जी तरीके से एक निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया था, जिसकी जानकारी होने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नारधा गांव में 50 एकड़ से अधिक शासकीय घास भूमि मौजूद है, जो कि चारागाह, मुक्तिधाम एवं अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए आरक्षित है। हाल ही में कुछ लोगों द्वारा इस जमीन को खरीदने की कोशिश की जा रही थी, जिससे ग्रामीणों को संदेह हुआ और उन्होंने तत्काल ऑनलाइन रिकॉर्ड निकलवाया।
रिकॉर्ड में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि लगभग 10 एकड़ सरकारी जमीन एक निजी व्यक्ति महेश दम्मानी के नाम पर दर्ज है, जिसका गांव से कोई सीधा संबंध नहीं है। जब ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की, तो तुरंत प्रभाव से उस नाम को हटाकर जमीन को दोबारा सरकारी कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह फर्जीवाड़ा बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति के नाम पर शासकीय जमीन को दर्ज करना गंभीर अनियमितता है और इसके पीछे निश्चित तौर पर प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत है।
ग्रामीण अब मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, इस पूरे मामले पर धमतरी कलेक्टर का कहना है कि “मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण जन जागरूकता और संवेदनशीलता से किस तरह सरकारी संसाधनों की रक्षा की जा सकती है।





