BY
Yoganand Shrivastava
Delhi अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने सबसे विनाशकारी दौर में पहुँच गया है। युद्ध के नौवें दिन इजराइल ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल क्षेत्र पर बड़ा हमला किया है। इजराइली वायुसेना ने तेहरान और आसपास के इलाकों में स्थित रिफाइनरी और डिपो को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई है। वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए इस जंग को क्षेत्रीय युद्ध में बदलते हुए पड़ोसी अरब देशों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं।
ईरान की ऊर्जा शक्ति पर इजराइल का सर्जिकल स्ट्राइक
Delhi इजराइली मीडिया के अनुसार, शनिवार देर रात हुए हवाई हमलों में ईरान के 30 विशाल ईंधन टैंक और 3 मुख्य तेल डिपो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। तेहरान के अलबोर्ज प्रांत और करज शहर में स्थिति बेहद गंभीर है। हमलों के बाद रिसाव के कारण तेल शहर की नालियों में बहने लगा है, जिससे सड़कों के किनारे ‘आग की नदियाँ’ बहती दिखाई दे रही हैं। यहाँ तक कि तेहरान में ‘काली बारिश’ (तेल मिश्रित बारिश) होने की भी खबरें हैं। इजराइली सेना ने इसके साथ ही इस्फहान हवाई अड्डे पर ईरान के प्रतिष्ठित F-14 लड़ाकू विमानों और रडार प्रणालियों को भी ध्वस्त करने का दावा किया है।
ईरान का पलटवार: 5 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले
Delhi इजराइली हमलों से बौखलाए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘छह महीने तक युद्ध लड़ने’ का संकल्प लेते हुए इजराइल के साथ-साथ कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और UAE पर भी हमले किए हैं।
- कुवैत: यहाँ के 22 मंजिला सरकारी भवन और अल-अदीरी एयरबेस (अमेरिकी हेलीकॉप्टर केंद्र) को ड्रोन से निशाना बनाया गया।
- दुबई: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास ईरानी ड्रोन देखे जाने के बाद अफरा-तफरी का माहौल रहा। ईरान का आरोप है कि ये देश अपनी जमीन का इस्तेमाल अमेरिका और इजराइल को हमले के लिए करने दे रहे हैं। IRGC के अनुसार, उन्होंने मिडिल ईस्ट में फैले करीब 200 अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों को रडार पर ले लिया है।
Delhi ट्रम्प का तीखा हमला और वैश्विक चिंता
Delhi अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को ‘लूजर’ करार दिया है। ट्रम्प का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण ईरान अब कमजोर पड़ रहा है और उसने पड़ोसी देशों से माफी मांगना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, कतर के अमीर और चीन के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध दुनिया के लिए तेल संकट और खतरनाक परिणाम ला सकता है। अब तक इस जंग में करीब 1483 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों नागरिक बेघर हो गए हैं। ब्रिटेन और मेक्सिको जैसे देशों में युद्ध के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं।





