BY
Yoganand Shrivastava
Dehli : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी किए गए इक्विटी रेगुलेशन 2026 ने देश के शैक्षणिक और राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है। इन नियमों के लागू होने के साथ ही कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।
‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ और विरोध की मुख्य वजह
Dehli UGC के नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, ST और पहली बार OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। सामान्य वर्ग के छात्र संगठनों का तर्क है कि OBC को पहले से ही आरक्षण का लाभ मिल रहा है, ऐसे में उन्हें भेदभाव से संरक्षण की विशेष सूची में शामिल करना अनुचित है। इसी विरोध के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी सरकारी नीतियों से नाराजगी जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
नेताओं की चुप्पी पर ‘चूड़ियाँ’ और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
Dehli विरोध का एक अनोखा स्वरूप उत्तर प्रदेश के रायबरेली में देखने को मिला, जहाँ मौन साधे हुए जनप्रतिनिधियों को चूड़ियाँ भेजने का अभियान शुरू किया गया है। वहीं, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इसे सनातन धर्म पर हमला करार दिया है। दूसरी ओर, जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो वे सीधे जवाब देने के बजाय जयकारे लगाते हुए नजर आए। हालांकि, वामपंथी छात्र संगठनों (AISA) ने इन नियमों का स्वागत करते हुए इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।
सरकार की कानूनी तैयारी और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Dehli विवाद की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से परामर्श किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक दर्जन से अधिक याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील अब चीफ जस्टिस की बेंच के सामने इन मामलों की जल्द सुनवाई की मांग करने की तैयारी में हैं। बढ़ते दबाव के बीच खबर है कि UGC जल्द ही इन नियमों को लेकर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।
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