रिपोर्टर: आज़ाद सक्सेना
दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) अभियान को लेकर एक नया कीर्तिमान कायम हुआ है। सोमवार को 12 और नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिससे इस वर्ष इस अभियान के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों की कुल संख्या पहली बार 1005 तक पहुँच चुकी है।
मुख्य बातें:
- इस बार आत्मसमर्पण करने वालों में 9 इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल ₹28.50 लाख का ईनाम घोषित था।
- प्रमुख कैडर में DVCM स्तर के चंद्रन्ना उर्फ बुरसु और अमित उर्फ हुंगा भी शामिल थे, जिन पर ₹8 लाख का ईनाम था।
- चंद्रन्ना आख़िरी 30 वर्षों से नक्सल संगठन में सक्रिय था, लेकिन पुलिस-प्रशासन की पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण प्रक्रिया को भरोसेमंद मानकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
- आत्मसमर्पण करने में 3 महिला नक्सलियों भी शामिल हैं, जो पुलिस दबाव, ग्रामीण जागरूकता और पुनर्वास योजनाओं से प्रेरित हुईं।
- एसपी गौरव रॉय ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में इस अभियान के तहत कुल 296 इनामी माओवादी आत्मसमर्पित हो चुके हैं।
महत्वपूर्ण उपलब्धि
- ‘लोन वर्राटू’ अभियान की शुरुआत जून 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटना था।
- अब इस अभियान में आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या 1000 पार होने से यह नक्सल उन्मूलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
- एसपी गौरव रॉय ने आत्मसमर्पण करने वालों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें पुनर्वास नीति के अंतर्गत आर्थिक सहायता, पहचान पत्र, बैंक खाता, प्रशिक्षण और सरकारी सुविधाएँ दी जाएंगी।
- इस रणनीति से नक्सली प्रभावित क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीद मजबूत हुई है।





