रिपोर्टर: विष्णु गौतम
दुर्ग में स्कूल और शिक्षकों का होगा संतुलित समायोजन, शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने कलेक्टर ने साझा की योजना
छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश पर दुर्ग जिले में स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को लेकर आज कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर अभिषेक सिंह ने पत्रकारों से बातचीत की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को संतुलित, सुव्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया?
दुर्ग जिले की कुल 1105 शालाओं में से केवल 08 शालाओं का समायोजन किया जा रहा है।
शेष 1097 स्कूल यथावत रूप से संचालित रहेंगे।
कम छात्र संख्या वाली शालाओं को पास की बेहतर शालाओं में मिलाया गया है।
इससे शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों का उपयोग दोनों बेहतर होगा।
आंकड़ों में युक्तियुक्तकरण की स्थिति
श्रेणी संख्या
कुल शालाएं 1105
समायोजित शालाएं 08
यथावत शालाएं 1097
युक्तियुक्त शालाएं (अब तक) 641
पास की शालाओं में मर्ज 349
समायोजन के बाद संचालित स्कूल प्रा. – 5, पूर्व मा. – 200, हाई – 21, हायर से. – 36
अतिशेष शिक्षक 637
नए पदस्थ शिक्षक 366
मुख्य उद्देश्य और लाभ
शिक्षक विहीन स्कूलों को संबल मिलेगा, जिससे विद्यार्थियों को निरंतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।
गणित और विज्ञान जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षक मिल सकेंगे।
क्लस्टर मॉडल के माध्यम से एक ही परिसर की शालाओं को समाहित किया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे का समुचित उपयोग और स्थापना व्यय में कमी होगी।
ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी क्योंकि बच्चों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलन से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
कलेक्टर का बयान
कलेक्टर अभिषेक सिंह ने साफ कहा,
“यह कोई कटौती नहीं है, बल्कि शिक्षा में समानता और गुणवत्ता लाने की दिशा में एक सुधारात्मक कदम है। हमारे उद्देश्य केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि छात्र हितैषी हैं।”





