अक्टूबर में ही ठंड की दस्तक: क्यों घट रही है धूप और क्यों पहले आ रही है कड़ाके की सर्दी?

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली | इस बार अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम ने करवट ले ली है। उत्तर भारत में शाम होते ही हल्की सर्द हवाओं का अहसास होने लगा है, जबकि पहाड़ों पर बर्फबारी ने ठंड का आगाज कर दिया है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान सामान्य से नीचे चला गया है, और लोग अब गर्म कपड़ों की तलाश में हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों इस बार सर्दी जल्दी आ रही है और हर साल धूप के घंटे कम होते जा रहे हैं?


हिमालय में बर्फबारी से बढ़ी ठंड, मैदानों में असर शुरू

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊपरी इलाकों में इस सीजन की पहली बर्फबारी ने सर्दी की दस्तक दे दी है। हिमालय की कई चोटियाँ अब बर्फ की चादर में ढक चुकी हैं। बर्फबारी के कारण कुछ जगहों पर यातायात प्रभावित हुआ है और तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है।
पहाड़ों की इस बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी महसूस होने लगा है — दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शाम होते ही गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है।


मौसम विभाग का अनुमान: इस बार पड़ेगी सामान्य से अधिक ठंड

भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, इस साल उत्तर भारत में सामान्य से ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह शुरुआती संकेत हैं और ठंड की तीव्रता को लेकर पक्के अनुमान के लिए अभी समय है। आईएमडी के वैज्ञानिक नरेश कुमार के मुताबिक, “यह अस्थायी दौर है जिसमें पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश और बर्फबारी हुई है। इससे फिलहाल तापमान में गिरावट आई है, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं टिकेगी।”


ला नीना का असर और मौसम के बदलते पैटर्न

विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल ला नीना की स्थिति विकसित हो रही है। यह एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान घटता है, जिससे भारत और एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक ठंड पड़ती है।
मौसम विज्ञानी सोनम लोटस ने बताया कि जम्मू-कश्मीर और हिमालयी इलाकों में इस बार सर्दी जल्दी आने के संकेत हैं। ला नीना के कारण ठंडी हवाएं ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे सर्दी का दौर लंबा भी खिंच सकता है।


धूप के घंटे क्यों घट रहे हैं?

मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के चलते वायुमंडलीय नमी और बादलों की परतों में वृद्धि हुई है, जिसके कारण धूप के घंटे लगातार घट रहे हैं। सूर्य की किरणें धरती तक कम पहुंच रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट और सर्दियों की तीव्रता बढ़ती जा रही है।
यह परिवर्तन केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है — दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में भी दिन के समय की अवधि पिछले दशक की तुलना में घटती दिख रही है।


आने वाले महीनों में क्या होगा मौसम का हाल

IMD के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर के अंत से नवंबर के बीच तापमान और गिरेगा। दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत में ठंड का पीक देखने को मिलेगा।
ला नीना के प्रभाव के कारण गंगा के मैदानी इलाकों में कोहरे और ठंडी हवाओं का दौर लंबा चल सकता है। हालांकि, दिसंबर के आख़िर तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

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