BY
Yoganand Shrivastava
कहानी और कॉन्सेप्ट
Cinema फिल्म ‘राहु केतु’ पौराणिक कथाओं के रहस्यमय पात्र राहु और केतु को इंसानी रूप में पेश करती है। ये पात्र लोगों के पापों का आईना दिखाते हैं और अच्छाई-बुराई का संतुलन बनाने लगते हैं। कहानी हिमाचल प्रदेश के एक छोटे शहर से शुरू होती है, जहां लेखक चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्ढा) अपनी किस्मत से परेशान है। तभी फूफाजी (पीयूष मिश्रा) की जादुई डायरी से राहु और केतु जन्म लेते हैं। फिल्म हल्के-फुल्के अंदाज में पौराणिक विचारों और सिचुएशनल कॉमेडी को जोड़ती है, जिससे बच्चों और फैमिली ऑडियंस के लिए भी मनोरंजन का अनुभव बनता है।

निर्देशन, तकनीकी पक्ष और लोकेशन्स
Cinema निर्देशक विपुल विग ने पौराणिक तत्वों को बच्चों के अनुकूल और मजेदार अंदाज में पेश किया है। कॉमेडी ज्यादातर सिचुएशन्स पर आधारित है, जो फिल्म की खासियत है। हिमाचल की लोकेशन्स फिल्म को विज़ुअली फ्रेश बनाती हैं। बैकग्राउंड स्कोर कहानी में घुलता है, लेकिन म्यूजिक और कुछ लंबी एडिटिंग फिल्म का कमजोर पहलू हैं। कुछ सीन अनावश्यक लंबे लगते हैं, जबकि कुछ हिस्सा दर्शकों को बांधे रखता है।

अभिनय और निष्कर्ष
Cinema वरुण शर्मा (राहु) और पुलकित सम्राट (केतु) की जोड़ी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उनका कॉमिक टाइमिंग और बॉडी लैंग्वेज दर्शकों को बार-बार हंसाती है। पीयूष मिश्रा का फूफाजी किरदार भी कहानी में रंग भरता है। फिल्म फुकरे जैसी लगातार हंसी नहीं देती, लेकिन हल्के-फुल्के मनोरंजन और परिवार के साथ देखने के लिए यह एक अच्छा विकल्प है। कहानी का आइडिया शानदार है, लेकिन इसे पूरी तरह साधा नहीं गया। सीक्वल की संभावना के साथ, उम्मीद है अगली बार यह और मजबूत और मनोरंजक होगी।





