केंद्र सरकार ने नो-डिटेंशन पॉलिसी की खत्म
दिल्ली: 5वीं व 8वीं कक्षा की परीक्षा में फेल होने वाले छात्र-छात्राओं को अब पास नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने ”नो डिटेंशन पॉलिसी” खत्म कर दी है। पहले इस नियम के तहत फेल होने वाले विद्यार्थियों को दूसरी क्लास में प्रमोट कर दिया जाता था। लेकिन अब सरकार के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक फेल होने वाले बच्चों को 2 महीने के अंदर दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। अगर वे दोबारा फेल होते हैं, तो उन्हें प्रमोट नहीं किया जाएगा, बल्कि जिस क्लास में वो पढ़ रहे थे उसी में दोबारा पढ़ेंगे सकेंगे। सरकार ने इसमें एक प्रावधान भी जोड़ा है कि 8वीं तक के ऐसे बच्चों को स्कूल से निकाला भी नहीं जाएगा।
16 राज्यों में पहले से खत्म है ”नो-डिटेंशन पॉलिसी”
16 राज्यों में पहले से नो-डिटेंशन पॉलिसी खत्म है। केंद्र सरकार की नई पॉलिसी का असर केंद्रीय स्कूलों, नवोदय विद्यालयों व सैनिक स्कूलों समेत करीब 3000 से अधिक स्कूलों पर पड़ेगा। 16 राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश, दिल्ली और पुडुचेरी ने ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ पहले पहले ही खत्म कर दी थी। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार स्कूली शिक्षा राज्य का विषय है, इसलिए राज्य इस संबंध में अपना निर्णय ले सकते हैं।
गौरतलब है कि 2018 में लोकसभा में बिल पास हुआ था, इस बिल राइट टु एजुकेशन को संशोधित करने के लिए पेश किया गया था। इसमें स्कूलों में लागू ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म करने की बात थी। इसके अनुसार 5वीं और 8वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए नियमित परीक्षा की मांग की गई थी। इसी के साथ फेल होने वाले विद्यार्थियों के लिए 2 महीने के अंदर री-एग्जाम कराने की भी बात कही गई थी। 2019 में ये बिल राज्य सभा में पास हुआ। इसके बाद राज्य सरकारों को ये अधिकार था कि वो ”नो डिटेंशन पॉलिसी” हटा सकते हैं या लागू रख सकते हैं. यानी राज्य सरकार ये फैसला ले सकती थीं कि 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्रों को प्रमोट किया जाए या उसी कक्षा में बैठाया जाए।





