सीबीआई ने वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अमित कुमार सिंघल को रिश्वत लेते गिरफ्तार, 3.5 किलो सोना और 1 करोड़ नकद जब्त

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सीबीआई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अमित कुमार सिंघल को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि उनके परिसरों से भारी मात्रा में नकदी और सोना जब्त किया गया है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

गिरफ्तारी और जब्ती का पूरा मामला

सीबीआई ने अमित कुमार सिंघल के परिसरों की तलाशी के दौरान लगभग 1 करोड़ रुपये नकद और 3.5 किलो सोना जब्त किया है। सिंघल को 25 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए उनके एक सहयोगी के साथ गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई 31 मई 2025 को दर्ज शिकायत के बाद की गई।

अमित कुमार सिंघल, जो 2007 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, वर्तमान में नई दिल्ली के आईटीओ स्थित सीआर बिल्डिंग में करदाता सेवा निदेशालय में अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर तैनात थे।

आरोप क्या हैं?

सीबीआई के मुताबिक, अमित सिंघल ने एक शिकायतकर्ता से 45 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। यह रकम उन्होंने राजस्व और आयकर विभाग से सुविधाजनक या अनुकूल व्यवहार दिलाने के बदले में मांगी थी।

शिकायतकर्ता को कानूनी कार्रवाई, भारी जुर्माना और उत्पीड़न की धमकियां भी दी गईं, ताकि वह दबाव में आकर रिश्वत दे। सीबीआई ने इस मामले में जाल बिछाया और 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। रिश्वत मोहाली में अमित सिंघल के आवास पर मांगी और ली जा रही थी। बाद में उन्हें वसंत कुंज, नई दिल्ली स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया।

छापों में क्या मिला?

सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई और पंजाब में कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान:

  • 3.5 किलो सोना (लगभग 2.3 करोड़ रुपये का मूल्य)
  • 2 किलो चांदी
  • करीब 1 करोड़ रुपये नकद
  • 25 बैंक खाते और एक लॉकर्स के दस्तावेज़
  • कई डिजिटल सबूत और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।

सीबीआई ने बताया कि अब तक जब्त चल और अचल संपत्तियों का मूल्यांकन चल रहा है और जांच में और खुलासे हो सकते हैं।

अगला कदम और न्यायिक हिरासत

दोनों आरोपियों को 1 जून 2025 को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और सीबीआई ने कड़ी नजर रखी हुई है।


यह मामला यह बताता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई कितनी गंभीर और सतर्क है। उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई से न केवल सिस्टम की साख बढ़ेगी, बल्कि आम जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

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