विश्लेषकों का मानना है कि शेयरों की बिक्री पर दीर्घकालिक या अल्पकालिक कैपिटल गेन टैक्स को कम करने या पूरी तरह समाप्त करने से ही विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में वापस नहीं आएंगे। उनका कहना है कि यह कदम सही दिशा में है, लेकिन विदेशी निवेशकों को स्थायी रूप से आकर्षित करने के लिए अतिरिक्त नीतिगत उपायों की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों की राय
कोटक महिंद्रा एएमसी के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा, “कैपिटल गेन टैक्स में कमी निश्चित रूप से निवेशकों के लिए कर-पश्चात रिटर्न को बढ़ाएगी। लेकिन केवल टैक्स में कटौती से रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को आकर्षित करने के लिए अन्य कदम भी उठाने होंगे।”

संभावित उपाय:
- प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) में एफपीआई के लिए विशेष कोटा, जिसमें निर्गम मूल्य पर अच्छी छूट दी जाए।
- सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड निष्पादन में अन्य निवेशकों पर प्राथमिकता, यदि यह एफपीआई के लिए लाभकारी हो।
- सरकार द्वारा एफपीआई निवेश पर सुनिश्चित रिटर्न की गारंटी।
- केवाईसी (नो योर कस्टमर) और आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने से छूट।
शाह ने आगे कहा, “ये कुछ ऐसे उपाय होंगे जो वैश्विक स्तर पर पहली बार पेश किए जा सकते हैं और भारत के समकक्ष देशों में उपलब्ध नहीं हैं। यह पैकेज निश्चित रूप से एफपीआई को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा।”
समीर अरोड़ा का तर्क
हेलिओस कैपिटल के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी समीर अरोड़ा ने बिजनेस स्टैंडर्ड मंथन समिट 2025 में तर्क दिया कि विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त करने से भारतीय पूंजी बाजार गहरे और जीवंत बनेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया के 200 देशों में से 199 देश विदेशी निवेशकों के शेयर बाजार निवेश पर कोई टैक्स नहीं लगाते।
उन्होंने बताया कि विदेशी निवेशक मुद्रा उतार-चढ़ाव से भी नुकसान उठाते हैं, क्योंकि टैक्स भारतीय रुपये में चुकाया जाता है, जिसे बाद में डॉलर में परिवर्तित कर उनके देश भेजा जाता है।
अरोड़ा के आंकड़े:
- पिछले सात वर्षों में भारतीय बाजार सालाना लगभग 12% बढ़ा, जो डॉलर में प्री-टैक्स 7-8% है।
- 2022-23 में भारत ने कैपिटल गेन टैक्स से 99,000 करोड़ रुपये (लगभग 10 अरब डॉलर) एकत्र किए, लेकिन यह सालाना आंकड़ा नहीं है। यह शेयर बाजार के चक्र के शीर्ष पर देखा गया।
- सामान्य वर्षों में यह राशि 2-3 अरब डॉलर ही होती है।
अरोड़ा ने कहा, “सरकार को बाजारों और एफआईआई का सम्मान करना चाहिए।”
भारत में कैपिटल गेन टैक्स का इतिहास
कैपिटल गेन टैक्स 1946-47 में शुरू हुआ और 1956 में टी. टी. कृष्णमाचारी ने इसे स्थायी बनाया। उस समय 15,000 रुपये तक के लाभ पर टैक्स से छूट थी। इसके ऊपर की राशि पर स्लैब के आधार पर टैक्स लगता था, जिसमें सबसे ऊंची श्रेणी (10 लाख रुपये से अधिक) पर 31.3% टैक्स था।
2024 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैपिटल गेन, एफएंडओ आय और नई कर व्यवस्था में बदलाव किए:
- अल्पकालिक कैपिटल गेन (एसटीसीजी) टैक्स 15% से बढ़कर 20%।
- दीर्घकालिक कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स सभी वित्तीय और गैर-वित्तीय संपत्तियों पर 10% से बढ़कर 12.5%।
- एलटीसीजी के लिए छूट सीमा 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ष तक बढ़ाई गई।
- एफएंडओ पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) फ्यूचर्स के लिए 0.01% से 0.02% और ऑप्शंस के लिए 0.06% से 0.1% हुआ।
बाजार में बिकवाली का कारण
कोटक अल्टरनेट असेट मैनेजर्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार जितेंद्र गोहिल के अनुसार, हालिया बिकवाली टैक्स से संबंधित नहीं है, बल्कि भारतीय शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन, मजबूत डॉलर और विकास को गति देने वाली बड़ी सुधारों की कमी इसका कारण है।
उन्होंने कहा कि भारत का राजनीतिक और वित्तीय जोखिम प्रीमियम कम हुआ है, लेकिन एफपीआई और दीर्घकालिक निवेशकों को भूमि, श्रम, कृषि और राजनीति में सुधारों के जरिए विकास की तेजी चाहिए।
गोहिल ने कहा, “सरकार ने निजीकरण और विनिवेश जैसे सुधारों से पीछे हटने का संकेत दिया है। हालांकि, भविष्य में कम राजनीतिक बाधाओं के कारण सुधार एजेंडा पटरी पर लौट सकता है।”
बाजार आंकड़े
अक्टूबर 2024 से शुरू हुई गिरावट में एफपीआई ने 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के भारतीय शेयर बेचे। इस दौरान:
- सेंसेक्स में 13% और निफ्टी में 14% की गिरावट।
- मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में क्रमशः 19% और 23% की कमी।
आगे की राह
एएसके हेज सॉल्यूशंस के सीईओ वैभव संघवी ने कहा, “जब कोई निवेशक भारत में प्रवेश या निकास करता है, तो हमें उन्हें अन्य देशों, खासकर उभरती या पूंजी की कमी वाले अर्थव्यवस्थाओं के निवेशकों के समान व्यवहार करना चाहिए। जब तक हम विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन जाते, तब तक हमें लगातार पूंजी की जरूरत है। विदेशी निवेशकों के लिए एलटीसीजी में कटौती भारत को विकास और रिटर्न के लिहाज से आकर्षक बनाएगी।”
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