BY
Yoganand Shrivastava
बंगाल में जीत का दबाव
BJP बीजेपी ने 45 वर्षीय नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है। नबीन के सामने सबसे पहली बड़ी चुनौती बंगाल में पार्टी की पैठ बढ़ाना है। करीब 2-3 महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के मजबूत संगठन और ग्रामीण इलाकों में पकड़ का सामना करना होगा। नबीन को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, विकास और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना होगा और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना होगा।
असम में जीत की हैट्रिक
BJP असम में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करना नबीन की दूसरी बड़ी चुनौती है। पिछले चुनावों में बीजेपी ने 2016 और 2021 में सरकार बनाई थी, लेकिन नागरिकता कानून और अन्य विवादों के कारण समर्थन बनाए रखना कठिन है। नबीन को आदिवासी समुदाय और चाय बागानों के मजदूरों के बीच विश्वास बनाए रखना होगा और सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाना होगा।
दक्षिण भारत में विस्तार
BJP दक्षिण भारत में केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में बीजेपी की कमजोर स्थिति नबीन के लिए तीसरी चुनौती है। इन राज्यों में स्थानीय भाषा, संस्कृति और विकास के मुद्दों पर काम करना जरूरी होगा। नबीन युवा होने के नाते स्थानीय युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर पार्टी को ग्राउंड स्तर पर मजबूत कर सकते हैं।
GEN-Z का विश्वास बनाए रखना
BJP युवा पीढ़ी यानी GEN-Z के साथ जुड़ाव नबीन की चौथी बड़ी चुनौती है। युवाओं की रुचि रोजगार, शिक्षा, डिजिटल अधिकार और पर्यावरण के मुद्दों में है। नबीन को सोशल मीडिया और आधुनिक संवाद माध्यमों के जरिए GEN-Z को पार्टी की नीतियों और योजनाओं से जोड़ना होगा।
एनडीए गठबंधन को मजबूत बनाए रखना
बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में कई क्षेत्रीय पार्टियां हैं। आगामी चुनावों से पहले सीट बंटवारे और अन्य मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं। नबीन को सभी सहयोगियों के साथ संतुलित संवाद करना होगा और गठबंधन को एकजुट रखना होगा।
बीजेपी की अपेक्षाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बधाई दी और उन्हें पार्टी के मामलों में अपना ‘बॉस’ बताया। नबीन की ग्राउंड वर्कर छवि और युवाओं से जुड़ाव बीजेपी की उम्मीदों को बढ़ा रही है, जबकि उनके सामने बंगाल, असम और दक्षिण भारत में संगठन विस्तार तथा GEN-Z को जोड़ने की चुनौती है।





