पोस्टर्स पर घमासान, परिणाम से पहले सियासी कोहराम
by: vijay nandan
पटना: बिहार की सियासत का सबसे अहम दिन आ चुका है। कल यानी 14 नवंबर को मतगणना होने वाली है और उससे पहले पूरे राज्य का माहौल पोस्टर्स वार से गरमा गया है। जेडीयू मुख्यालय के बाहर नीतीश कुमार के फोटो वाला एक पोस्टर लगा है, जिसमें लिखा है टाइगर अभी जिंदा है। दूसरी तरफ इसके जवाब में समाजवादी पार्टी के नेताओं आरजेडी के समर्थन एक पोस्टर जारी किया है. जिसमें तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव की फोटो लगी है. पोस्टर में लिखा है ‘अलविदा चाचा”. ये पोस्टर्स बताते हैं कि सभी एग्जिट पोल्स में जनाधार के अनुमान के बाद जेडीयू खेमे में फुल कॉन्फिडेंस है. जबकि महागठबंधन के नेता भी बंपर वोटिंग होने से पूरे विस्वास के साथ अपने पक्ष में जनादेश मिलने की उम्मीद लगा रहे हैं. लेकिन नेताओं में दावे प्रति वादों का दौर कोई नई बात नहीं है। हर चुनाव परिणाम से पहले ऐसा ही माहौल देखा जाता रहा है। बता दें कि 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें कल खुलेने वाली ईवीएम पर टिक गई हैं। बस एक कत्ल की रात बाकी है. कल सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी।

एग्जिट पोल्स में एनडीए को बढ़त
बता दें कि विभिन्न एग्जिट पोल्स के मुताबिक, एनडीए को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। इससे नीतीश कुमार खेमे में फिर से आत्मविश्वास लौट आया है। जेडीयू मुख्यालय में “टाइगर अभी जिंदा है” के पोस्टर लगाए गए हैं, जबकि आरजेडी ने पलटवार करते हुए “अलविदा चाचा” लिखे पोस्टरों से सियासी माहौल और गरमा दिया।

दोनों दलों के समर्थक सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक एक-दूसरे पर तंज कसते दिख रहे हैं। एनडीए नेताओं का कहना है कि जनता ने विकास के एजेंडे पर वोट किया है, वहीं आरजेडी का दावा है कि इस बार जनता की जीत और तेजस्वी यादव की ताजपोशी तय है।
ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों से हंगामा
इस बीच सासाराम में देर रात ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर हंगामा मच गया। समर्थकों ने स्ट्रांग रूम के बाहर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें एक प्रत्याशी और एक पत्रकार घायल हुए हैं। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समय सीसीटीवी फुटेज देखा जा सकता है।
पूर्णिया में दिग्गजों की किस्मत दांव पर
वहीं, पूर्णिया में पांच पूर्व मंत्रियों और एक मौजूदा मंत्री की किस्मत ईवीएम में कैद है। प्रदेशभर में प्रत्याशी और उनके समर्थक अपने-अपने गणित बिठाने में जुटे हैं। अब बस कुछ ही घंटों में यह तय होगा कि बिहार की सत्ता की चाबी एनडीए के हाथ में जाती है या महागठबंधन के पास लौटती है। कल की सुबह बिहार के लिए सिर्फ नतीजों की नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक समीकरण की सुबह भी साबित हो सकती है।





